उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
गुरुवार, मई 24, 2012
इस दौर में
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महगाई के इस दौर में प्रेम की क्या करे बात भूखे रहकर सूख गये सारे के सारे जज्बात "ज्योति खरे"
रविवार, मई 20, 2012
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फफूंद लगी रोटियां रोटी की तलाश के बजाय बमों की तलाश मैं जुटे हैं हम डरते हैं रोटियों को कोई हथिया न ले----------- भूखे पेट रहकर एक त...
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बुधवार, मई 09, 2012
जेठ मास में
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अनजाने ही मिले अचानक एक दुपहरी जेठ मास में खड़े रहे हम बरगद नीचे तपती गर्मी जेठ मास में - प्यास प्यार की लगी हुई होंठ मांगते पीना सरकी...
दुःख
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महफ़िल दुखड़ो पर आयोजित हंसी खो गई अभी - अभी दुःख की चर्चा जगह - जगह सुख की बातें कभी - कभी ......... -"ज्योति" ...
सोमवार, मई 07, 2012
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जीवन भर कलम के साथ सफ़र करता रहा कागज के महल में प्यार के शब्द भरता रहा रेगिस्तान में अपनी नाव किस तरफ मोड़े जहरीले वातावरण मैं तिल- ति...
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love
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प्यार भी अजीब है चाहे जब दरवाज़ा खटखटाता है दिल घबराहट मे दहल जाता है खोलता हूँ - डरते -डरते मन के किवाड़ पंछी प्यार का धीरे से नि...
शुक्रवार, अप्रैल 27, 2012
Wartman
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Naa Allah Chaiye Naa Raam Chaiye Thake hue Musafir Ko Bus Aaram Chaiye
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