उम्मीद तो हरी है .........

दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है

बुधवार, जून 27, 2012

संत

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         संत  यह  बिलकुल सही है कि संतो कि वाणी सुनकर  संतो का जीवन देखकर  संतो का सुख देखकर  साधारण आदमी भी  संत बनना चाहता है ..............
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सोमवार, मई 28, 2012

जीवन..

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 खा लिया है भूखे पेट ने आकाश जीवन थक कर  हो गया हताश अब भी तराशना नहीं झोडा उनने रंगने उबाल रहे हैं पलाश 
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गुरुवार, मई 24, 2012

इस दौर में

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महगाई के इस दौर में प्रेम की क्या करे बात भूखे रहकर सूख गये सारे के सारे जज्बात           "ज्योति खरे"
रविवार, मई 20, 2012

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फफूंद लगी रोटियां रोटी की तलाश के बजाय बमों की तलाश मैं जुटे हैं हम  डरते हैं रोटियों को कोई हथिया न ले----------- भूखे पेट रहकर एक त...
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बुधवार, मई 09, 2012

जेठ मास में

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अनजाने ही मिले अचानक   एक दुपहरी जेठ मास में  खड़े रहे हम बरगद नीचे  तपती गर्मी जेठ मास में - प्यास प्यार की लगी हुई होंठ मांगते पीना  सरकी...

दुःख

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महफ़िल दुखड़ो पर आयोजित  हंसी खो गई अभी - अभी    दुःख की चर्चा जगह - जगह   सुख की बातें कभी - कभी ......... -"ज्योति"         ...
सोमवार, मई 07, 2012

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जीवन भर कलम के साथ सफ़र करता रहा  कागज के महल में  प्यार के शब्द भरता रहा  रेगिस्तान  में अपनी नाव किस तरफ मोड़े  जहरीले वातावरण मैं तिल- ति...
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Jyoti khare
छिंदवाडा, India
अपनी ज़मीन पर खड़ा एक साधारण आदमी.... http://www.youtube.com/c/jyotikhare
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