उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, जुलाई 25, 2012
गीत-----सूख रहे आंगन के पौधे----------
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गीत-----सूख रहे आंगन के पौधे---------- घर में जबसे अपनों ने अपनी अपनी राह चुनी चाहत के हर दरवाजे पर...
4 टिप्पणियां:
शुक्रवार, जुलाई 20, 2012
नवगीत********** =सरकती प्यार की चुनरी=
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नवगीत********** =सरकती प्यार की चुनरी= ------------------------------ ------------------- बांध कर पास रखना ...
गुरुवार, जुलाई 19, 2012
नव गीत ---- साँस रखी दावं ......
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नव गीत ---- साँस रखी दावं ...... दहशत की धुंध से घबडाया गाँव ...
सोमवार, जुलाई 16, 2012
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सुधबुध खो बेठी बहक गया सावन बारिश में भींग रहा अल्हड़पन............... "ज्योति"
1 टिप्पणी:
शनिवार, जुलाई 14, 2012
गाँधी के इस देश में....
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गाँधी के इस देश में-------- सुबह-सुबह पढते ही समाचार शर्म से झुक जाते हैं सिर अंधे,गूंगे,बहरे चौराहों पर भीड़ दहशत में मौन है------...
शुक्रवार, जुलाई 13, 2012
सड़क पर भटकते,घूमते....
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सड़क पर भटकते,घूमते अचानक प्यार में गिरफ्तार हो गया लोग कहते हैं-------? वो आबाद हो गया थोड़ी सी जमीन ही तो मिली थी उसे गरीब...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, जुलाई 06, 2012
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फूल कोमल क्यूँ बना सुगंध ही बता पायेगी प्यार करने के तरीकों को तितली ही बता पायेगी ............. "ज्योति...
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