उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
शुक्रवार, नवंबर 23, 2012
गालियां देता मन ......
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गालियां देता मन देह्शत भरा माहौल चुप्पियां दरवाजा बंद करेंगी खिडकियां देंगी खोल----- आदमी की खाल चाहिये भूत पीटें डिडोरा--- मरी हु...
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सोमवार, नवंबर 05, 2012
करवा चौथ का चाँद उसी दिन रख दिया था हथेली पर
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करवा चौथ का चाँद उसी दिन रख दिया था हथेली पर तुम्हारे जिस दिन मेरे आवारापन को स्वीकारा था तुमने--------- सूरज से चमकते गालों पर पपड़ाए होंठो...
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शुक्रवार, अक्टूबर 19, 2012
रेत
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रेत तुमसे बात करना तुम्हे मुट्ठी में भरना तुम्हारी भुरभुरी छाती पर उँगलियों से नाम लिखना बहुत भाता है तुमसे कई जन्मों का नाता है------- रेत...
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शनिवार, सितंबर 29, 2012
प्रेम की कविता------
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प्रेम कविता------- तुम सोचती होगी तुम्हारे भीतर जो कुछ कांपता है वह क्या मेरे भीतर भी कांपता होगा--- बहुत देर तक कांपता हूँ जब पास ह...
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रविवार, सितंबर 09, 2012
Nawya - बारिश
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Nawya - बारिश
शनिवार, अगस्त 04, 2012
भूख से बेहाल बच्चे को
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बिक गयी बज़ार में हजारों टन मिठाई एक टुकड़ा भी नहीं हुआ नसीब भूख से बेहाल बच्चे को बीनता है पन्नी हमारे घरों के करीब...... ...
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बुधवार, जुलाई 25, 2012
गीत-----सूख रहे आंगन के पौधे----------
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गीत-----सूख रहे आंगन के पौधे---------- घर में जबसे अपनों ने अपनी अपनी राह चुनी चाहत के हर दरवाजे पर...
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