उम्मीद तो हरी है .........

दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है

रविवार, जनवरी 27, 2013

सपनों को भी ऊगाना-------

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उलाहना देती आवाज गूंजती निकल जाती है करीब से कहती है सुनो आम आदमी के सपने उपज रहे हैं जमीन से------ सिखाकर उड़ा दिये जाते हैं  पत्थरों के ...
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गुरुवार, जनवरी 24, 2013

खादी के सफ़ेद कुरते में ----------

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अब पडोसी के अमरूद तोड़कर नहीं खाये जाते सीधा पडोसी को ही कर दिया जाता है खलास--------- लोग अब छुट्टियों में अपने गांव नहीं जाते शहर में ही...
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बुधवार, जनवरी 23, 2013

सिसकियां रोकने घर की-------

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तुम्हे देखने की जिद में जोड़ता रहा कांच के टुकड़े पागलों की भीड़ में एक और पागल जुड़ गया------- लेकर चले थे मशाल मुट्ठी में रखने मंजिल  सिसकि...
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गुरुवार, जनवरी 17, 2013

गंगा तुम भी पवित्र हो जाओ--------

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गंगा की छाती पर भर गया महाकुंभ महाकुंभ में बस गई कई कई बस्तियां बस्तियों में जुट रही हस्तियां------ वह जो उजाड़ते आये हैं निरंतर,ल...
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गुरुवार, जनवरी 10, 2013

------गुस्सा हैं अम्मा--------

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नहीं जलाया कंडे का अलाव नहीं बनाया गक्कड़ भरता नहीं बनाये मैथी के लड्डू नहीं बनाई गुड़ की पट्टी अम्मा ने इस बार----- कड़कड़ाती ठंड में भी नही...
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बुधवार, जनवरी 09, 2013

धुंधलाई यादों से बिसर गये हैं लोग--------

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शराफत की ठंड से सिहर गये हैं लोग दुश्मनी की आंच से बिखर गये हैं लोग------   जिनके चेहरों पर धब्बों की भरमार है आईना देखते ही निखर गये हैं...
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सोमवार, जनवरी 07, 2013

ब से भारत-----ब से बाबा बाबाओं के लिये----------

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  यह  बिलकुल सही है कि बाबाओं की वाणी सुनकर  बाबाओं का जीवन देखकर  बाबाओं का सुख देखकर  साधारण आदमी भी  बाबा बनना चाहता है ........
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Jyoti khare
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