उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
गुरुवार, फ़रवरी 21, 2013
खून *****
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हंसते हुये घर से निकले गली गली से गुजरे चौराहे पर सब अलग अलग गलियों से आकर मिले---- हवा खून से सने पांव पांव बिना आहट के टकरायी...
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गुरुवार, फ़रवरी 14, 2013
प्रेम *******
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पुरखों की पगड़ी में बंधा सुहागन की काली मोतियों के बीच फंसा धडकते दिलों का बीज मंत्र है----- फूलों का रंग भवरों की जान बसंत सी मा...
13 टिप्पणियां:
बुधवार, फ़रवरी 13, 2013
परिणय के सत्ताईस वर्ष ************************
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तुम्हारे मेंहदी रचे हाथों में रख दी थी अपनी भट्ट पड़ी हथेली महावर लगे तुम्हारे पांव रख गये थे खुरदुरी जमीन पर साझा संकल्प लिया था हम दोनो...
11 टिप्पणियां:
सोमवार, फ़रवरी 11, 2013
बसंत-------
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सफ़र से लौटकर आने की आहटों से ...
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बुधवार, फ़रवरी 06, 2013
ओ मेरी सुबह---------
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ओ मेरी सुबह सींच देती हो जड़ें ...
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शनिवार, फ़रवरी 02, 2013
सुना है-------
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धुंधली आंखें भी पहचा...
15 टिप्पणियां:
रविवार, जनवरी 27, 2013
सपनों को भी ऊगाना-------
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उलाहना देती आवाज गूंजती निकल जाती है करीब से कहती है सुनो आम आदमी के सपने उपज रहे हैं जमीन से------ सिखाकर उड़ा दिये जाते हैं पत्थरों के ...
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