उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
शनिवार, मार्च 30, 2013
गम अगरबत्ती की तरह देर तक जल करते हैं---------
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दर्द में लिपटी एक पाकीज़ा की शायरी ...
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गुरुवार, मार्च 28, 2013
रंग बह गये------
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धुल गया गाल पर लगा रंग उंगलियों के निशान रह गये---- चलते रहे आँखों में अतीत के चलचित्र स्मृतियाँ रह गयी रंग बह गये------ "ज्योति खर...
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मंगलवार, मार्च 26, 2013
एक चुटकी गुलाल--------
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लगा लेना संबंधों के गाल पर स्नेह और प्यार भरा एक चुटकी गुलाल स्वीकारना,मुस्कराना कल्पनाओं के रंगों में डूबा हूँ मैं---------- "ज्य...
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रविवार, मार्च 24, 2013
यार फागुन------
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यार फागुन सालभर में एक बार दबे पांव आते हो खोलकर प्रेम के रहस्यों को चले जाते हो------ यार फागुन तुम तो केवल रंगों की बात करते हो प्यार क...
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बुधवार, मार्च 20, 2013
चिडिया-----
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फुदक फुदक आँगन में आकर सामूहिक चहचहाती अन्नपूर्णा का भजन सुनाती दाना चुगती फुर्र हो जाती--- धूप चटकती तब तिनके तिनके जोड़ जोड़ कर घर के को...
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सोमवार, मार्च 18, 2013
टेसू--------
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समेटकर बैचेनियां फागुन की दहक गया टेसू दो घूंट पीकर महुये की बहक गया टेसू------ सुर्ख सूरज को चिढ़ाता खिलखिलाता प्रेम की दीवानगी का रूतबा ...
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बुधवार, मार्च 13, 2013
जान लौट आयेगी-------
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सींचकर आंख की नमी से ...
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