उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
मंगलवार, सितंबर 02, 2014
भीतर ही भीतर -------
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घर घर के भीतर घर कुछ कच्चे, कुछ पक्के रिश्ते रिश्तों के भीतर रिश्ते कुछ मीठे, कुछ खट्टे ...
गुरुवार, अगस्त 21, 2014
हम बेमतलब क्यों डर रहें हैं ----
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सांप के कान नहीं होते हम बेमतलब जिरह की बीन क्यों बजाने पर तुले हैं माना कि कर्ज की सुपारी में लपेटकर भेजी जा रही है ...
सोमवार, अगस्त 18, 2014
कृष्ण ने कल मुझसे सपने में बात की -------
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आधुनिक काल की कंदराओं से निकलकर मेरा कब सार्वजानिक जीवन में प्रवेश हुआ होगा मुझे नहीं मालूम ---- मेरी भक्ति की...
शुक्रवार, अगस्त 15, 2014
आजादी ------ ???
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समय की रेत पर अंधाधुंध भागते पैरों के निशान गवाह हैं कि चीरकर गुलामी को फेंफड़ों में भर दी गयी गई थी आजाद सांसें ...
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शुक्रवार, अगस्त 01, 2014
आवाजें सुनना पड़ेंगी -----
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जो कुछ भी कुदरती था उसकी सांसों से ...
20 टिप्पणियां:
सोमवार, जुलाई 21, 2014
नदारत हो जायेगी धूप ------
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काले वहशी बादलों का झुंड रेशमी चादर में लिपटी ...
13 टिप्पणियां:
शुक्रवार, जून 20, 2014
फुरसतिया बादल ------
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बजा बजा कर ढोल नगाड़े फुरसतिया ब...
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