उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, अक्टूबर 08, 2014
शरद का चाँद -------
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ख़ामोशी तोड़ो सजधज के बाहर निकलो उसी नुक्कड़ पर मिलो जहाँ कभी बोऐ थे हमने शरद पूर्णिमा के दिन आँखों से रिश्ते -...
रविवार, अक्टूबर 05, 2014
हादसों के घाव से रिस रहे खून------
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रौशनियों की चकाचौंध में उत्साह से भरा उत्सव चमचमाता उल्लास अचानक अंधाधुंध भागते पैरों के तले कुचल जाता है ---- ऐसा क्या हो जाता...
रविवार, सितंबर 28, 2014
अम्मा का आशीष- मुझे मिला सरस्विता पुरस्कार---
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प्रसिद्ध रचनाकार,ब्लॉगर रश्मि प्रभा जी की माताश्री सरस्वती प्रसाद जी की पहली पुण्यतिथि पर "सरस्वती प्रसाद को स...
बुधवार, सितंबर 10, 2014
प्रेम के गणित में -----
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गांव के इकलौते तालाब के किनारे बैठकर जब तुम मेरा नाम लेकर फेंकते थे कंकड़ पानी की हिलोरों के संग डूब जाया क...
मंगलवार, सितंबर 02, 2014
भीतर ही भीतर -------
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घर घर के भीतर घर कुछ कच्चे, कुछ पक्के रिश्ते रिश्तों के भीतर रिश्ते कुछ मीठे, कुछ खट्टे ...
गुरुवार, अगस्त 21, 2014
हम बेमतलब क्यों डर रहें हैं ----
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सांप के कान नहीं होते हम बेमतलब जिरह की बीन क्यों बजाने पर तुले हैं माना कि कर्ज की सुपारी में लपेटकर भेजी जा रही है ...
सोमवार, अगस्त 18, 2014
कृष्ण ने कल मुझसे सपने में बात की -------
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आधुनिक काल की कंदराओं से निकलकर मेरा कब सार्वजानिक जीवन में प्रवेश हुआ होगा मुझे नहीं मालूम ---- मेरी भक्ति की...
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