उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, जनवरी 14, 2015
अम्मा का निजि प्रेम -------
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आटे के ठोस तिली के मुलायम लड्डू मीठी नीम के तड़के से लाल मिर्च शक्कर भुरका नमकीन हींग,मैथी,र...
शनिवार, जनवरी 03, 2015
इस बरस और कई कई बरस ----
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कई वर्षों से इकठ्ठे टुकनियां भर निवेदनों को एक ही झटके में झटककर मन के हवालात में अपराधियों की कतार में खड़ा कर दिया ...
बुधवार, दिसंबर 17, 2014
दुनियां की सभी माओं के आंसू ----
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सीढ़ी पर बैठे बच्चे बच्चे नहीं समूची दुनियां के नयी सदी के मनुष्य थे सीढ़ी पर बैठकर...
7 टिप्पणियां:
शुक्रवार, अक्टूबर 10, 2014
करवा चौथ का चाँद-------
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चाँद तो मैंने उसी दिन रख दिया था हथेली पर तुम्हारे जिस दिन मेरे आवारापन को स्वीकारा था तुमने-- सूरज से चमकते गालों पर पपड़ाए होंठों प...
बुधवार, अक्टूबर 08, 2014
शरद का चाँद -------
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ख़ामोशी तोड़ो सजधज के बाहर निकलो उसी नुक्कड़ पर मिलो जहाँ कभी बोऐ थे हमने शरद पूर्णिमा के दिन आँखों से रिश्ते -...
रविवार, अक्टूबर 05, 2014
हादसों के घाव से रिस रहे खून------
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रौशनियों की चकाचौंध में उत्साह से भरा उत्सव चमचमाता उल्लास अचानक अंधाधुंध भागते पैरों के तले कुचल जाता है ---- ऐसा क्या हो जाता...
रविवार, सितंबर 28, 2014
अम्मा का आशीष- मुझे मिला सरस्विता पुरस्कार---
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प्रसिद्ध रचनाकार,ब्लॉगर रश्मि प्रभा जी की माताश्री सरस्वती प्रसाद जी की पहली पुण्यतिथि पर "सरस्वती प्रसाद को स...
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