उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, सितंबर 23, 2015
इरादों की खेती करेंगे ----
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अपने इरादों को तुमने ही दो भागों में बांटा था तुम अपने हिस्से का दुपट्टे में बांधकर ले गयी थी यह कहकर मैं अपने इरादे पर कायम रहूंग...
सोमवार, सितंबर 07, 2015
बिटिया के आँचल में -----
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अपने आँचल में ममता की झील बांधे हो यह झील विरासत में मिली हैं तुम्हें फिर झील को क्यों बांटना चाहती हो ...
गुरुवार, अगस्त 20, 2015
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर ----
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वर्षों से प्यार के लिए उपासे हैं नर्मदा के घाट पर प्यासे हैं ----- अपनी आंखों में उतार लाया हूँ नर्मदा को --19.8.2015 ...
मंगलवार, जून 30, 2015
स्त्रियां जानती हैं
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स्त्री को बचा पाने की ...
गुरुवार, जून 18, 2015
होना तो कुछ चाहिए
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कविता संग्रह का विमोचन ***************************** वरिष्ठ कवि ज्योति खरे के पहले कविता संग्रह "होना त...
शुक्रवार, मई 01, 2015
कामरेड आगे बढ़ो --------
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कामरेड तुम्हारी भीतरी चिंता तुम्हारे चेहरे पर उभर आयी है तुम्हारी लाल आँखों से साफ़ झलकता है कि,तुम उदासीन लोगों को जगाने में जुटे हो --...
गुरुवार, फ़रवरी 26, 2015
आज भी रिस रहा है -----
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जब कभी तराशा होगा पहाड़ को दर्दनाक चीख आसमान तक तो पहुंची होगी--- आसमान तो आसमान है वह तो केवल अपनी ...
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