उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
मंगलवार, फ़रवरी 09, 2016
अंधेरे में आया था
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शंकाऐं ह्रदय तट पर जमघट लगाएं अरमान मरघट सजाऐं--- बांधकर दाल दी है मैंने गठरी में यातनायें और पीड़ा फ...
सोमवार, अक्टूबर 26, 2015
शरद का चाँद बनकर ----
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कुछ कागज में लिखी स्मृतियाँ कुछ में सपने कुछ में दर्द कुछ में लिखा चाँद चांद रोटियों की शक्ल में ढल गया भ...
7 टिप्पणियां:
मंगलवार, अक्टूबर 13, 2015
मिट्टी से सनी उंगलियां --------
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पूरब से ऊगता तमतमाता आग उगलता सूरज नंगे पाँव चलता है मटके का पानी पी पी कर थके मुसाफिर की तरह--- आसमान में टंके सलम...
गुरुवार, अक्टूबर 08, 2015
चुप्पियों की उम्र क्या है -----
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अपराधियों की दादागिरी साजिशों का दरबार वक़्त थमता तो बताते जुर्म की रफ़्तार ---- गुनाह का नमूना ढूंढ कर हम क्या करेंगें सत्य...
बुधवार, सितंबर 23, 2015
इरादों की खेती करेंगे ----
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अपने इरादों को तुमने ही दो भागों में बांटा था तुम अपने हिस्से का दुपट्टे में बांधकर ले गयी थी यह कहकर मैं अपने इरादे पर कायम रहूंग...
सोमवार, सितंबर 07, 2015
बिटिया के आँचल में -----
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अपने आँचल में ममता की झील बांधे हो यह झील विरासत में मिली हैं तुम्हें फिर झील को क्यों बांटना चाहती हो ...
गुरुवार, अगस्त 20, 2015
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर ----
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वर्षों से प्यार के लिए उपासे हैं नर्मदा के घाट पर प्यासे हैं ----- अपनी आंखों में उतार लाया हूँ नर्मदा को --19.8.2015 ...
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