उम्मीद तो हरी है .........

दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है

सोमवार, जून 05, 2017

एक हरे पेड़ की तलाश

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🔴🌴 निकले थे गमझे में कुछ जरुरी सामान बांध कर   किसी पुराने पेड़ के नीचे बैठकर बीनकर लाये हुए कंडों को सुलगाकर ग...
सोमवार, सितंबर 12, 2016

बिटिया, जीत तो तुम्हारी ही होती है ----

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सुबह होते ही फेरती हो स्नेहमयी उंगलियाँ उनींदी घास हो जाती है तरोताजा गुनगुनाने की आवाज सुनते ही निकलकर घोंसलों से टहनियों पर पंख फटकार...
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मंगलवार, फ़रवरी 09, 2016

अंधेरे में आया था

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शंकाऐं ह्रदय तट पर जमघट लगाएं अरमान मरघट सजाऐं--- बांधकर दाल दी है मैंने गठरी में यातनायें और पीड़ा फ...
सोमवार, अक्टूबर 26, 2015

शरद का चाँद बनकर ----

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    कुछ कागज में लिखी स्मृतियाँ कुछ में सपने कुछ में दर्द कुछ में लिखा चाँद   चांद रोटियों की शक्ल में ढल गया भ...
7 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, अक्टूबर 13, 2015

मिट्टी से सनी उंगलियां --------

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पूरब से ऊगता तमतमाता आग उगलता सूरज नंगे पाँव चलता है मटके का पानी पी पी कर थके मुसाफिर की तरह--- आसमान में टंके सलम...
गुरुवार, अक्टूबर 08, 2015

चुप्पियों की उम्र क्या है -----

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अपराधियों की दादागिरी साजिशों का दरबार वक़्त थमता तो बताते जुर्म की रफ़्तार ---- गुनाह का नमूना ढूंढ कर हम क्या करेंगें सत्य...
बुधवार, सितंबर 23, 2015

इरादों की खेती करेंगे ----

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अपने इरादों को तुमने ही दो भागों में बांटा था तुम अपने हिस्से का दुपट्टे में बांधकर ले गयी थी यह कहकर मैं अपने इरादे पर कायम रहूंग...
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Jyoti khare
छिंदवाडा, India
अपनी ज़मीन पर खड़ा एक साधारण आदमी.... http://www.youtube.com/c/jyotikhare
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