उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
सोमवार, जनवरी 22, 2018
बसंत के आने की आहट
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सफर से लौटकर आने की आहटों से चोंक गए बरगद, नीम, आम महुओं का उड़ गया नशा बड़े बड़े दरख्तों के फूल गए फेंफड़े हर तरफ कानों में घुलने लगा ...
मंगलवार, जनवरी 16, 2018
गंगा की छाती पर
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गंगा की छाती पर ************** गंगा की छाती पर जब भरने लगता है महाकुंभ महाकुंभ में बस जाती हैं कई कई बस्तियां बस्तियों में सम्मलित हो ...
शुक्रवार, जनवरी 12, 2018
ठंड
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ठंड **** 1 सहमी शरमाई सी दिनभर खड़ी रही धूप ठंड दुबककर रजाई में शाम से पी रही टमाटर का सूप-- 2 टपक रही सुबह कोहरे के संग सूरज के...
रविवार, दिसंबर 31, 2017
वादों का मफ़लर
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लपेटकर रख लिया है तुम्हारे ऊनी आसमानी शाल में पिछला साल उम्मीद थी कि, बर्फ़ीली हवाओं में ओढ़ कर बैठेंगें और जाती हुई नमी को एक दूसरे क...
शुक्रवार, दिसंबर 15, 2017
प्रेम का पुनः अंकुरण
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कुछ देर मेरे पास भी बैठ लो धूप में पहले जैसे जब खनकती चूड़ियों में समाया रहता था इंद्रधनुष मौन हो जाती थी पायल और तुम अपनी हथेली में ...
सोमवार, नवंबर 13, 2017
दुख पराये नहीं होते
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दुख पराये नहीं होते बहुत खास होते हैं अपनों से भी अधिक जैसे पुरुष के लिए प्रेमिका स्त्री के लिए प्रेमी प्रेम का रस खट्टा मीठा होता है...
शनिवार, अक्टूबर 28, 2017
कागज में लिखा चाँद
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कुछ कागज में लिखी स्मृतियाँ कुछ में सपने कुछ में सुख कुछ में दुख कुछ में लिखा चाँद चांद रोटियों की शक्ल में ढल गया भूख और पेट की बहस म...
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