उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, जनवरी 31, 2018
चुप्पियों की उम्र क्या है
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चुप्पियों की उम्र क्या है ****************** अपराधियों की दादागिरी साजिशों का दरबार वक्त का जालिम करिश्मा अंधी है सरकार बेगुनाही का नम...
गुरुवार, जनवरी 25, 2018
अपने ही घरों से ------
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शराफत की ठंड से सिहर गये हैं लोग दुश्मनी की आंच से बिखर गये हैं लोग-- जिनके चेहरों पर धब्बों की भरमार है आईना देखते ही निखर गये हैं लोग...
सोमवार, जनवरी 22, 2018
बसंत के आने की आहट
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सफर से लौटकर आने की आहटों से चोंक गए बरगद, नीम, आम महुओं का उड़ गया नशा बड़े बड़े दरख्तों के फूल गए फेंफड़े हर तरफ कानों में घुलने लगा ...
मंगलवार, जनवरी 16, 2018
गंगा की छाती पर
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गंगा की छाती पर ************** गंगा की छाती पर जब भरने लगता है महाकुंभ महाकुंभ में बस जाती हैं कई कई बस्तियां बस्तियों में सम्मलित हो ...
शुक्रवार, जनवरी 12, 2018
ठंड
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ठंड **** 1 सहमी शरमाई सी दिनभर खड़ी रही धूप ठंड दुबककर रजाई में शाम से पी रही टमाटर का सूप-- 2 टपक रही सुबह कोहरे के संग सूरज के...
रविवार, दिसंबर 31, 2017
वादों का मफ़लर
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लपेटकर रख लिया है तुम्हारे ऊनी आसमानी शाल में पिछला साल उम्मीद थी कि, बर्फ़ीली हवाओं में ओढ़ कर बैठेंगें और जाती हुई नमी को एक दूसरे क...
शुक्रवार, दिसंबर 15, 2017
प्रेम का पुनः अंकुरण
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कुछ देर मेरे पास भी बैठ लो धूप में पहले जैसे जब खनकती चूड़ियों में समाया रहता था इंद्रधनुष मौन हो जाती थी पायल और तुम अपनी हथेली में ...
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