उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
रविवार, मई 12, 2019
अम्मा कभी नहीं हुई बीमार
›
अम्मा सुबह सुबह फटा-फट नहाकर अध-कुचियाई साड़ी लपेटकर तुलसी चौरे पर सूरज को प्रतिदिन बुलाती आकांक्षाओं का दीपक जलाती फिर दर्पण के सामन...
19 टिप्पणियां:
रविवार, अप्रैल 14, 2019
इन दिनों
›
नंगी प्रजातियों की नंगी जबान थूककर गुटक रहें अपने बयान- फेंक रहे लपेटकर मुफ्त आश्वासन मनभावन मुद्दों की खुली है दुकान---- देश को लूटने ...
8 टिप्पणियां:
बुधवार, अप्रैल 10, 2019
ठूंठ पेड़ से क्या मांगे
›
बरगद जैसे फैले बरसों जीते चन्दन रहते और विष पीते -- मौसम गहनों जैसा करता मक्कारी पूरे जंगल की बनी परसी तरकारी नंगे मन का भेष धरें ज...
13 टिप्पणियां:
सोमवार, अप्रैल 01, 2019
मूर्ख दिवस पर -- समझदारी की बातें
›
चिल्लाकर मुहं खोल बे खुल्म खुल्ला बोल बे नेताओं की तोंद देखकर पचका पेट टटोल बे सुरा सुंदरी और सत्ता का स्वाद चखो बकलोल बे सत्ता नाच रह...
20 टिप्पणियां:
शुक्रवार, मार्च 29, 2019
आई पी एल और बच्चे
›
खेल तो हम कभी भी खेल लेंगे ********************** जीत और हार की संभावनाओं के साथ पान पराग, विमल, राजश्री, के पाऊच और गोल्डफ्लेग सिगरेट के...
4 टिप्पणियां:
सोमवार, मार्च 18, 2019
छेवला उर्फ टेसू
›
फागुन की समेटकर बैचेनियां दहक रहा टेसू महुये की दो घूंट पीकर बहक रहा टेसू--- सुर्ख सूरज को चिढ़ाता खिलखिलाता प्रेम की दीवानगी का रूत...
15 टिप्पणियां:
शुक्रवार, मार्च 08, 2019
स्त्रियां चाहती हैं
›
चाहती हैं ईट भट्टोंँ में काम करने वाली स्त्रियां कि, उनका भी अपना घर हो चाहती हैं खेतों पर भूखे रहकर अनाज ऊगाने वाली स्त्रियां कि, ...
9 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें