उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
रविवार, जून 02, 2019
सावित्री का प्रेम आज भी जिंदा है-----
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डंके की चोट पर ऐंठ कर पकड़ ली मृत्यु के देवता की कालर विद्रोह का बजा दिया बिगुल निवेदनों की लगा दी झड़ी गहरे धरातल से खींच कर ले आयी ...
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रविवार, मई 26, 2019
तपती गरमी जेठ मास में ------
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अनजाने ही मिले अचानक एक दोपहरी जेठ मास में खड़े रहे हम बरगद नीचे तपती गरमी जेठ मास में- प्यास प्यार की लगी हुयी होंठ मांगते पीना सरकी च...
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सोमवार, मई 20, 2019
नदी और पहाड़
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अच्छे दोस्त हैं नदी और पहाड़ दिनभर एक दूसरे को धकियाते खुसुर-पुसुर बतियाते हैं रात के गहन सन्नाटे में दोनों अपनी अपनी चाहतों को सहलात...
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रविवार, मई 12, 2019
अम्मा कभी नहीं हुई बीमार
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अम्मा सुबह सुबह फटा-फट नहाकर अध-कुचियाई साड़ी लपेटकर तुलसी चौरे पर सूरज को प्रतिदिन बुलाती आकांक्षाओं का दीपक जलाती फिर दर्पण के सामन...
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रविवार, अप्रैल 14, 2019
इन दिनों
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नंगी प्रजातियों की नंगी जबान थूककर गुटक रहें अपने बयान- फेंक रहे लपेटकर मुफ्त आश्वासन मनभावन मुद्दों की खुली है दुकान---- देश को लूटने ...
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बुधवार, अप्रैल 10, 2019
ठूंठ पेड़ से क्या मांगे
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बरगद जैसे फैले बरसों जीते चन्दन रहते और विष पीते -- मौसम गहनों जैसा करता मक्कारी पूरे जंगल की बनी परसी तरकारी नंगे मन का भेष धरें ज...
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सोमवार, अप्रैल 01, 2019
मूर्ख दिवस पर -- समझदारी की बातें
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चिल्लाकर मुहं खोल बे खुल्म खुल्ला बोल बे नेताओं की तोंद देखकर पचका पेट टटोल बे सुरा सुंदरी और सत्ता का स्वाद चखो बकलोल बे सत्ता नाच रह...
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