उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
शनिवार, अप्रैल 04, 2020
इन दिनों सपने नहीं आते
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सपने अभी अभी लौटे हैं कोतवाली में रपट लिखाकर दिनभर हड़कंप मची रही सपनों की बिरादरी में क्या अपराध है हमारा कि आंखों ने ...
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सोमवार, मार्च 23, 2020
सन्नाटा
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सन्नाटे के गाल पर मारो नहीं चांटा गले लगाओ इसे घबड़ाहट में यहां वहां भाग रहे मौसम को छतों,बालकनी आंगन पर पसरे सन्नाटे के ...
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मंगलवार, मार्च 17, 2020
कोरोना
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विषाणु कतई लापरवाह नहीं है इसे याद है अपना शिविर-घर चालाक और समझदार भी है जानता है कि इसके इशारे से ही दिल धड़केगा या न...
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रविवार, मार्च 08, 2020
चाहती हैं स्त्रियां
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ईट भट्टोंँ में काम करने वाली स्त्रियां चाहती हैं कि, उनका भी अपना घर हो खेतों पर भूखे रहकर अनाज ऊगाने वाली स्त्रियां च...
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बुधवार, मार्च 04, 2020
यार फागुन
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यार फागुन सालभर में एक बार चले आते हो दबे पांव खोलकर प्रेम के रहस्यों को फिर चले जाते हो तुम केवल बात करते हो रंगदारी से...
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गुरुवार, फ़रवरी 27, 2020
सावधान हो जाओ
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बादल दहाड़ते आते हैं बिजली बार-बार चमककर जीवन के उन अंधेरे हिस्सों को दिखाती है जिन्हें हम अनदेखा कर अपनी सुविधानुसार जीते हैं...
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शुक्रवार, फ़रवरी 14, 2020
अपन दोनों
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देखते,सुनते,झगड़ते चौंतीस वर्ष हो गये ************ तुम्हारे मेंहदी रचे हाथों में रख दी थी मैंने अपनी भट्ट पड़ी हथेली और तुमने ...
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