उम्मीद तो हरी है .........

दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है

सोमवार, मई 18, 2020

लौट रहें हैं अपने गांव--

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तुम्हारे वादों को  आवाजों को सिरे से खारिज कर  अपने मजबूत पांव में बांधकर आत्मनिर्भरता हम तो लौट रहें हैं अपने गांव-- शातिरों ने संवेदनाएं ल...
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शनिवार, मई 09, 2020

घर पहुंचने की चाहत में--

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घर पहुंचने की चाहत में निकले थे  गमछे में  कुछ जरूरी सामान बांधकर कि, रास्ते में चलते समय जब बहुत हताश  और भूख से बेहाल हो जायेंगे तो किसी  ...
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शुक्रवार, मई 01, 2020

कहां खड़ा है हमारा मजदूर--

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स्वतंत्र भारत के प्राकृतिक वातावरण में हम बेरोक टोक सांस ले रहे हैं, पर एक वर्ग ऐसा है, जिसकी साँसों में आज भी नियंत्रण है. ये वर्ग है हमारा...
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बुधवार, अप्रैल 15, 2020

मृत्यु ने कहा- मैं मरना चाहती हूं---

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मैं अहसास की जमीन पर ऊगी भयानक, घिनौनी, हैरतंगेज जड़हीना अव्यवस्था हूं जीवन के सफर में व्यवधान रंग बदलते मौसमों के पार समय के कथान...
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शनिवार, अप्रैल 04, 2020

इन दिनों सपने नहीं आते

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सपने अभी अभी लौटे हैं कोतवाली में रपट लिखाकर दिनभर हड़कंप मची रही सपनों की बिरादरी में क्या अपराध है हमारा कि आंखों ने ...
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सोमवार, मार्च 23, 2020

सन्नाटा

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सन्नाटे के गाल पर  मारो नहीं चांटा गले लगाओ इसे घबड़ाहट में यहां वहां भाग रहे मौसम को छतों,बालकनी  आंगन पर पसरे सन्नाटे के  ...
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मंगलवार, मार्च 17, 2020

कोरोना

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विषाणु कतई लापरवाह नहीं है इसे याद है  अपना शिविर-घर चालाक और समझदार भी है जानता है कि इसके इशारे से ही  दिल धड़केगा  या न...
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Jyoti khare
छिंदवाडा, India
अपनी ज़मीन पर खड़ा एक साधारण आदमी.... http://www.youtube.com/c/jyotikhare
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