उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
सोमवार, मई 25, 2020
ईद मुबारक
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सुबह से इंतजार है तुम्हारे मोंगरे जैसे खिले चेहरे को करीब से देखूं ईद मुबारक कह दूं पर तुम शीरखोरमा मीठी सिवैंईयां बांटने में लगी हो मा...
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सोमवार, मई 18, 2020
लौट रहें हैं अपने गांव--
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तुम्हारे वादों को आवाजों को सिरे से खारिज कर अपने मजबूत पांव में बांधकर आत्मनिर्भरता हम तो लौट रहें हैं अपने गांव-- शातिरों ने संवेदनाएं ल...
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शनिवार, मई 09, 2020
घर पहुंचने की चाहत में--
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घर पहुंचने की चाहत में निकले थे गमछे में कुछ जरूरी सामान बांधकर कि, रास्ते में चलते समय जब बहुत हताश और भूख से बेहाल हो जायेंगे तो किसी ...
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शुक्रवार, मई 01, 2020
कहां खड़ा है हमारा मजदूर--
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स्वतंत्र भारत के प्राकृतिक वातावरण में हम बेरोक टोक सांस ले रहे हैं, पर एक वर्ग ऐसा है, जिसकी साँसों में आज भी नियंत्रण है. ये वर्ग है हमारा...
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बुधवार, अप्रैल 15, 2020
मृत्यु ने कहा- मैं मरना चाहती हूं---
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मैं अहसास की जमीन पर ऊगी भयानक, घिनौनी, हैरतंगेज जड़हीना अव्यवस्था हूं जीवन के सफर में व्यवधान रंग बदलते मौसमों के पार समय के कथान...
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शनिवार, अप्रैल 04, 2020
इन दिनों सपने नहीं आते
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सपने अभी अभी लौटे हैं कोतवाली में रपट लिखाकर दिनभर हड़कंप मची रही सपनों की बिरादरी में क्या अपराध है हमारा कि आंखों ने ...
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सोमवार, मार्च 23, 2020
सन्नाटा
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सन्नाटे के गाल पर मारो नहीं चांटा गले लगाओ इसे घबड़ाहट में यहां वहां भाग रहे मौसम को छतों,बालकनी आंगन पर पसरे सन्नाटे के ...
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