उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, मई 25, 2022
बूंद
›
💧बूंद 💦 ******** उबलता हुआ जीवन आसमान की छत पर भाप बनकर चिपक जाता है जब तब काला सफ़ेद बादल घसीट कर भर लेता है अपने आगोश में ...
25 टिप्पणियां:
शनिवार, मई 21, 2022
चाय की चुस्कियों के साथ
›
चाय की चुस्कियों के साथ ******************** हांथ से फिसलकर मिट्टी की गुल्लक क्या फूटी छन्न से बिखर गयी चिल्लरों के साथ जोड़कर रख...
19 टिप्पणियां:
मंगलवार, मई 17, 2022
अभिवादन के इंतजार में
›
सामने वाली बालकनी से अभी अभी उठा कर ले गयी है पत्थर में लिपटा कागज शाम ढले छत पर आकर अंधेरे में खोलकर पढ़ेगी कागज चांद उसी समय तुम उसके छत...
11 टिप्पणियां:
गुरुवार, मई 05, 2022
कैसी हो फरज़ाना
›
कैसी हो "फरज़ाना" *************** अक्सर बगीचे में बैठकर करते थे घर,परिवार की बातें टटोलते थे एक दूसरे के दिलों में बसा प्रेम आज उस...
22 टिप्पणियां:
रविवार, मई 01, 2022
मजदूर
›
मजदूर ***** सपनों की साँसें सीने में बायीं ओर झिल्ली में बंद हैं जो कहीं गिरवी नहीं रखी न ही बिकी हैं, नामुमकिन है इनका बिकना गर्म,सख्त,श्...
12 टिप्पणियां:
रविवार, अप्रैल 24, 2022
किस्से सुनाने
›
किस्से सुनाने ----------------- बारूद में लिपटी जीवन की किताब को पढ़ते समय गुजरना पड़ता है पढ़ने की जद्दोज़हद से दहशतजदा दीवारों में जंग लगी खि...
13 टिप्पणियां:
गुरुवार, अप्रैल 14, 2022
फिर लिखूंगी नए सिरे से
›
स्कूल की टाटपट्टी में बैठकर स्लेट में खड़िया से लिखकर सीखा भविष्य का पहला पाठ फिर प्रारंभ हुआ अपने आप को समझने का दूसरा पाठ तीसरे पाठ में ...
13 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें