उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
रविवार, जून 05, 2022
विकलांग पेड़ों के पास से गुजरते हुए
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निकले थे गमझे में कुछ जरुरी सामान बांध कर कि किसी पुराने पेड़ के नीचे बैठेंगे और बीनकर लाये हुए कंडों को सुलगाकर पेड़ की छांव में गक्क्ड़ ...
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गुरुवार, जून 02, 2022
तपती गर्मी जेठ मास में
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अनजाने ही मिले अचानक एक दोपहरी जेठ मास में खड़े रहे हम बरगद नीचे तपती गरमी जेठ मास में- प्यास प्यार की लगी हुयी होंठ मांगते पी...
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बुधवार, मई 25, 2022
बूंद
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💧बूंद 💦 ******** उबलता हुआ जीवन आसमान की छत पर भाप बनकर चिपक जाता है जब तब काला सफ़ेद बादल घसीट कर भर लेता है अपने आगोश में ...
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शनिवार, मई 21, 2022
चाय की चुस्कियों के साथ
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चाय की चुस्कियों के साथ ******************** हांथ से फिसलकर मिट्टी की गुल्लक क्या फूटी छन्न से बिखर गयी चिल्लरों के साथ जोड़कर रख...
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मंगलवार, मई 17, 2022
अभिवादन के इंतजार में
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सामने वाली बालकनी से अभी अभी उठा कर ले गयी है पत्थर में लिपटा कागज शाम ढले छत पर आकर अंधेरे में खोलकर पढ़ेगी कागज चांद उसी समय तुम उसके छत...
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गुरुवार, मई 05, 2022
कैसी हो फरज़ाना
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कैसी हो "फरज़ाना" *************** अक्सर बगीचे में बैठकर करते थे घर,परिवार की बातें टटोलते थे एक दूसरे के दिलों में बसा प्रेम आज उस...
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रविवार, मई 01, 2022
मजदूर
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मजदूर ***** सपनों की साँसें सीने में बायीं ओर झिल्ली में बंद हैं जो कहीं गिरवी नहीं रखी न ही बिकी हैं, नामुमकिन है इनका बिकना गर्म,सख्त,श्...
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