उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
गुरुवार, जून 23, 2022
फुरसतिया बादल
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फुरसतिया बादल ************* बजा बजा कर ढोल नगाड़े फुरसतिया बादल आते बिजली के संग रास नचाते बूंद बूंद चुंचुआते-- कंक्रीट के शहर में ऋतुयें रहन...
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गुरुवार, जून 09, 2022
किससे पूछें किसका गांव
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किससे पूछें किसका गांव आधी धूप और आधी छांव जंगलों में ढूंढ रहे प्रणय का फासला अंदर ही अंदर घाव रहे तिलमिला सड़कों की दूरियां पास नहीं आती है...
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रविवार, जून 05, 2022
विकलांग पेड़ों के पास से गुजरते हुए
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निकले थे गमझे में कुछ जरुरी सामान बांध कर कि किसी पुराने पेड़ के नीचे बैठेंगे और बीनकर लाये हुए कंडों को सुलगाकर पेड़ की छांव में गक्क्ड़ ...
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गुरुवार, जून 02, 2022
तपती गर्मी जेठ मास में
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अनजाने ही मिले अचानक एक दोपहरी जेठ मास में खड़े रहे हम बरगद नीचे तपती गरमी जेठ मास में- प्यास प्यार की लगी हुयी होंठ मांगते पी...
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बुधवार, मई 25, 2022
बूंद
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💧बूंद 💦 ******** उबलता हुआ जीवन आसमान की छत पर भाप बनकर चिपक जाता है जब तब काला सफ़ेद बादल घसीट कर भर लेता है अपने आगोश में ...
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शनिवार, मई 21, 2022
चाय की चुस्कियों के साथ
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चाय की चुस्कियों के साथ ******************** हांथ से फिसलकर मिट्टी की गुल्लक क्या फूटी छन्न से बिखर गयी चिल्लरों के साथ जोड़कर रख...
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मंगलवार, मई 17, 2022
अभिवादन के इंतजार में
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सामने वाली बालकनी से अभी अभी उठा कर ले गयी है पत्थर में लिपटा कागज शाम ढले छत पर आकर अंधेरे में खोलकर पढ़ेगी कागज चांद उसी समय तुम उसके छत...
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