उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
गुरुवार, अगस्त 11, 2022
दोस्त के लिए
›
दोस्त के लिए *********** तार चाहे पीतल के हों या हों एल्युमिनियम के या हों फोन के दोस्त! दोस्ती के तार महीन धागों से बंधे होते हैं मुझे ...
10 टिप्पणियां:
गुरुवार, अगस्त 04, 2022
प्रेम को नमी से बचाने
›
प्रेम को नमी से बचाने **************** धुओं के छल्लों को छोड़ता मुट्ठी में आकाश पकड़े छाती में जीने का अंदाज बांधें चलता रहा अनजान रास्तों प...
13 टिप्पणियां:
बुधवार, जुलाई 13, 2022
मेरे हिस्से का बचा हुआ प्रेम
›
मेरे हिस्से का बचा हुआ प्रेम ********************** फूलों को देखकर कभी नहीं लगता कि,एक दिन मुरझा कर बिखर जाएंगे ज़मीन पर तितलियों को उड़ते दे...
21 टिप्पणियां:
गुरुवार, जुलाई 07, 2022
प्रेम देखता है
›
प्रेम देखता है ********** गांव के बूढ़े बरगद के नीचे बैठकर कुछ बूढ़े कहते हैं प्रेम अंधा होता है कुछ शहरी बूढ़े बगीचे में बिछी बेंचों पर बैठकर...
14 टिप्पणियां:
गुरुवार, जून 23, 2022
फुरसतिया बादल
›
फुरसतिया बादल ************* बजा बजा कर ढोल नगाड़े फुरसतिया बादल आते बिजली के संग रास नचाते बूंद बूंद चुंचुआते-- कंक्रीट के शहर में ऋतुयें रहन...
16 टिप्पणियां:
गुरुवार, जून 09, 2022
किससे पूछें किसका गांव
›
किससे पूछें किसका गांव आधी धूप और आधी छांव जंगलों में ढूंढ रहे प्रणय का फासला अंदर ही अंदर घाव रहे तिलमिला सड़कों की दूरियां पास नहीं आती है...
24 टिप्पणियां:
रविवार, जून 05, 2022
विकलांग पेड़ों के पास से गुजरते हुए
›
निकले थे गमझे में कुछ जरुरी सामान बांध कर कि किसी पुराने पेड़ के नीचे बैठेंगे और बीनकर लाये हुए कंडों को सुलगाकर पेड़ की छांव में गक्क्ड़ ...
23 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें