उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
सोमवार, अगस्त 21, 2023
बेमतलब
›
सांप के कान नहीं होते हम बेमतलब जिरह की बीन बजाने पर तुले हैं सांप दूध नहीं पीते हम बेमतलब कटोरी भर दूध पिलाने पर तुले हैं सांप के पांव नहीं...
6 टिप्पणियां:
शनिवार, अक्टूबर 08, 2022
शरद का चाँद
›
शरद का चाँद *********** ख़ामोशी तोड़ो सजधज के बाहर निकलो उसी नुक्कड़ पर मिलो जहाँ कभी बोऐ थे हमने चांदनी रात में आँखों से रिश्ते और हाँ ! बांध...
12 टिप्पणियां:
गुरुवार, सितंबर 22, 2022
तुम्हें उजालों की कसम
›
तुम्हें उजालों की कसम ****************** मैंने तुम्हें चेतन्य आंखों से देखा है लपटों से घिरा ज्वालाओं से प्रज्जलित मेरा आखिरी सम्बल भी विच...
21 टिप्पणियां:
गुरुवार, सितंबर 08, 2022
अब मैं उड़ सकूंगा
›
अब मैं उड़ सकूंगा *************** दिन बीता,शाम बीती रात देह पर डालकर अंधकार की चादर चली गयी रात को क्या पता आंखों में नींद पलकों के भीतर लेट ...
24 टिप्पणियां:
गुरुवार, अगस्त 25, 2022
राह देखते रहे
›
राह देखते रहे *********** राह देखते रहे उम्र भर क्षण-क्षण घडियां घड़ी-घड़ी दिन दिन-दिन माह बरस बीते आंखों के सागर रीते-- चढ़ आईं गंगा की...
31 टिप्पणियां:
गुरुवार, अगस्त 11, 2022
दोस्त के लिए
›
दोस्त के लिए *********** तार चाहे पीतल के हों या हों एल्युमिनियम के या हों फोन के दोस्त! दोस्ती के तार महीन धागों से बंधे होते हैं मुझे ...
10 टिप्पणियां:
गुरुवार, अगस्त 04, 2022
प्रेम को नमी से बचाने
›
प्रेम को नमी से बचाने **************** धुओं के छल्लों को छोड़ता मुट्ठी में आकाश पकड़े छाती में जीने का अंदाज बांधें चलता रहा अनजान रास्तों प...
13 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें