उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
गुरुवार, अक्टूबर 17, 2024
थिरकेगा पूरा गांव
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थिरकेगा पूरा गांव *************** तुम्हारी चूड़ियों की पायलों की तभी आती है आवाज़ जब में जुटा रहता हूं काम पर तुम्हारी आहटें मेरे चारों तरफ...
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गुरुवार, अगस्त 08, 2024
तुम्हारी खिलखिलाहट में
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तुम्हारी खिलखिलाहट में ******************* यह बात क्यों नहीं मानती कि बिना आभूषण बिना श्रृंगार के वैसे ही लगती हो जैसी की तुम हो शांत,निर्मल...
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गुरुवार, जुलाई 25, 2024
याद करती है माँ
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माँ जब तुम याद करती हो मुझे हिचकी आने लगती है मेरी पीठ पर लदा जीत का सामान हिलने लगता है विजय पथ पर चलने में तकलीफ होती है माँ मैं बहुत जल्द...
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गुरुवार, जुलाई 11, 2024
समीप खीचते हुए
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समीप खीचते हुए ************** मेरे और तुम्हारे विषय को लेकर मनगढ़ंत किस्सों में बेतुकी बातें दर्ज हैं यहां तक कि, दीवारों पर भी लिख दिया गया...
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गुरुवार, जुलाई 04, 2024
प्रेम को नमी से बचाने
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प्रेम को नमी से बचाने **************** धुओं के छल्लों को छोड़ता मुट्ठी में आकाश पकड़े छाती में जीने का अंदाज बांधें चलता रहा अनजान रास्तों ...
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गुरुवार, जून 27, 2024
चिमटियों में लटके किरदार
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चिमटियों में लटके किरदार ********************* बारिश थम गयी सड़कों का पानी सूख गया घर का आंगन अभी तक गीला है माँ के आंसू बहे हैं कितनी मुश्कि...
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रविवार, जून 16, 2024
पिता
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🔴 पिता **** अंधेरों को चीरते सन्नाटे में अपने से ही बात करते पिता यह सोचते थे कि उनकी आवाज़ कोई नहीं सुन रहा होगा मैं सुनता था कांच के चटकन...
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