उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, जुलाई 16, 2025
नहीं रख पाते
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नहीं रख पाते ********** खिलखिलाती बरसात नहला देती है पसीने से सनी धूप को उतरकर दीवारों के सहारे घुस जाती है घर के भीतर भर देती है मौन संबंधो...
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गुरुवार, मार्च 20, 2025
आजकल वह घर नहीं आती
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आजकल वह घर नहीं आती ********************** चटकती धूप में लाती है बटोरकर तिनके रखती है घर के सुरक्षित कोने में फिर बनाती है अपना शिविर घर ज...
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शनिवार, मार्च 08, 2025
स्त्री पिस जाती है
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स्त्री पिस जाती है ************* स्त्री पीसती है सिल-बट्टे में ससुर की देशी जड़ी बूटियां सास के लिए सौंठ,कालीमिर्च,अजवाइन पति के तीखे स्वाद ...
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शुक्रवार, फ़रवरी 14, 2025
गुलाब
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कांटों के बीच खिलने के बावजूद सम्मोहित कर देने वाले इनके रंग और देह से उड़ती हुई जादुई सुगंध को सूंघने भौंरों का लग जाता है मज़मा सूखी आंखों...
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गुरुवार, अक्टूबर 17, 2024
थिरकेगा पूरा गांव
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थिरकेगा पूरा गांव *************** तुम्हारी चूड़ियों की पायलों की तभी आती है आवाज़ जब में जुटा रहता हूं काम पर तुम्हारी आहटें मेरे चारों तरफ...
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गुरुवार, अगस्त 08, 2024
तुम्हारी खिलखिलाहट में
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तुम्हारी खिलखिलाहट में ******************* यह बात क्यों नहीं मानती कि बिना आभूषण बिना श्रृंगार के वैसे ही लगती हो जैसी की तुम हो शांत,निर्मल...
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गुरुवार, जुलाई 25, 2024
याद करती है माँ
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माँ जब तुम याद करती हो मुझे हिचकी आने लगती है मेरी पीठ पर लदा जीत का सामान हिलने लगता है विजय पथ पर चलने में तकलीफ होती है माँ मैं बहुत जल्द...
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