उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
सोमवार, अप्रैल 08, 2013
जंगल में कट जाये--------
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सुलगते कंडों से निकलती धुंये की धार ...
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शनिवार, अप्रैल 06, 2013
नमीं थी--------
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दीवाल पर टंगे सफ़ेद कागज़ पर ...
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मंगलवार, अप्रैल 02, 2013
हल्ला बोल बे--------
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चिल्लाकर मुहं खोल बे हल्ला बोल,हल्ला बोल बे---- ...
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शनिवार, मार्च 30, 2013
गम अगरबत्ती की तरह देर तक जल करते हैं---------
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दर्द में लिपटी एक पाकीज़ा की शायरी ...
28 टिप्पणियां:
गुरुवार, मार्च 28, 2013
रंग बह गये------
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धुल गया गाल पर लगा रंग उंगलियों के निशान रह गये---- चलते रहे आँखों में अतीत के चलचित्र स्मृतियाँ रह गयी रंग बह गये------ "ज्योति खर...
16 टिप्पणियां:
मंगलवार, मार्च 26, 2013
एक चुटकी गुलाल--------
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लगा लेना संबंधों के गाल पर स्नेह और प्यार भरा एक चुटकी गुलाल स्वीकारना,मुस्कराना कल्पनाओं के रंगों में डूबा हूँ मैं---------- "ज्य...
12 टिप्पणियां:
रविवार, मार्च 24, 2013
यार फागुन------
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यार फागुन सालभर में एक बार दबे पांव आते हो खोलकर प्रेम के रहस्यों को चले जाते हो------ यार फागुन तुम तो केवल रंगों की बात करते हो प्यार क...
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