उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
रविवार, जनवरी 06, 2019
शराफत की ठंड से
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शराफत की ठंड से सिहर गये हैं लोग दुश्मनी की आंच से बिखर गये हैं लोग-- जिनके चेहरों पर धब्बों की भरमार है आईना देखते ही निखर गये हैं लोग...
1 टिप्पणी:
बुधवार, जनवरी 02, 2019
बीती रात का गीत
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अनुबंधों का रूप तुम्हारा रात नहीं सोता होगा प्राणों के हर दरवाजे पर मेरे मन का तोता होगा------- आँखों का परिचय सब आँगन देहरी बांध गया ...
शनिवार, दिसंबर 29, 2018
आसमानी ऊनी शाल
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सम्हाल कर रखा है तुम्हारे वादों का दिया हुआ ब्राउन रंग का मफलर बांध लेता हूँ जब कभी कान में फुसफुसाकर कहती है ठंड कि, आज बहुत ठंड है...
शुक्रवार, दिसंबर 21, 2018
घाट पर धुलने गयी है व्यवस्था
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समर्थक परजीवी हो रहें हैं सड़क पर कोलाहल बो रहें हैं शिकायतें द्वार पर टंगी हैं अफसर सलीके से रो रहें हैं जश्न में डूबा समय मौन है जनमत ...
गुरुवार, दिसंबर 13, 2018
धूप में
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धूप में कुछ देर मेरे पास भी बैठ लो पहले जैसे जब खनकती चूड़ियों में समाया रहता था इंद्रधनुष मौन हो जाती थी पायल और तुम अपनी हथेली में ...
शनिवार, जून 16, 2018
ईद मुबारक
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सुबह से इन्तजार है तुम्हारे मोगरे जैसे खिले चेहरे को करीब से देखूं ईद मुबारक कह दूँ पर तुम शीरखुरमा, मीठी सिवईयाँ बांटने में लगी हो ...
बुधवार, जून 06, 2018
विकलांग
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निकले थे गमझे में कुछ जरुरी सामान बांध कर किसी पुराने पेड़ के नीचे बैठकर बीनकर लाये हुए कंडों को सुलगाकर गक्क्ड़ भरता बनायेंगे तपती दोप...
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