उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, मई 19, 2021
स्त्री बांधकर रखती है अपनी चुन्नी में
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डूबते सूरज को उठा लाया हूं तुम्हें सौंपने कि अभी बाकी है घुप्प अंधेरों से लड़ना कि अभी बाकी है नफरतों की चादरों से ढंकी प्रेम के ख़िलाफ़ हो रही...
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मंगलवार, मई 04, 2021
लोरियां सुनाने
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बीनकर लाती है जंगल से कुछ सपने कुछ रिश्ते कुछ लकड़ियां टांग देती है खूटी पर सपने सहेजकर रखती है आले में बिखरे रिश्ते डिभरी की टिमटिमाहट मेँ ट...
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मंगलवार, अप्रैल 27, 2021
गुहार
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गुहार **** गालियां देता मन दहशत भरा माहौल चुप्पियां दरवाजा बंद कर रहीं खिड़कियाँ रहीं खोल थर्मामीटर नाप रहा शहर का बुखार सिसकियां लगा रहीं...
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सोमवार, अप्रैल 19, 2021
चालीस घंटे
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चालीस घंटे ********* अपने होने और अपने जीने की उम्मीद को छाती में पकड़े पिता ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से अस्पताल में अकेले लेटे कराह रहे ह...
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रविवार, अप्रैल 11, 2021
आम आदमी
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आम आदमी ********** अपने आप से जूझता छली जा रही घटनाओं से बचता घिसट रहा है कचरे से भरे बोरे की तरह समय की तपती काली जमीन पर वह आसमान में ...
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शनिवार, अप्रैल 03, 2021
प्रेम के गणित में
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प्रेम के गणित में ************* गांव के इकलौते तालाब के किनारे बैठकर जब तुम मेरा नाम लेकर फेंकते थे कंकड़ पानी की हिलोरों के संग डूब जाया कर...
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शुक्रवार, मार्च 26, 2021
वृद्धाश्रम में होली
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वृद्धाश्रम में होली ************** बूढ़े दरख्तों में अपने पांव में खड़े रहने की जब तक ताकत थी टहनियों में भरकर रंग चमकाते रहे पत्तियां और फूल...
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