उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
बुधवार, फ़रवरी 13, 2019
साझा संकल्प
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तुम्हारे मेंहदी रचे हाथों में रख दी थी मैंने अपनी भट्ट पड़ी हथेली और तुमने महावर लगे अपने पांव रख दिये थे मेरे खुरदुरे आंगन में साझा स...
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शुक्रवार, फ़रवरी 01, 2019
सुना है
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धुंधली आंखें भी पहचान लेती हैं भदरंग चेहरे सुना है इन चेहरों में मेरा चेहरा भी दिखता है-- गुम गयी है व्यवहार की किताब शहर में सुना ...
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शुक्रवार, जनवरी 18, 2019
अम्मा का निजी प्रेम
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आटे के ठोस और तिली के मुलायम लड्डू मीठी नीम के तड़के से लाल मिर्च और शक्कर भुरका नमकीन हींग,मैथी,राई से बघरा मठा और नये चांवल की खिचड़ी ...
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शनिवार, जनवरी 12, 2019
वक्ष में फोड़ा हुआ
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पीठ पर सूरज बंधा पेट बिलकुल खाली कपकपाते हाथों से बजती नहीं ताली-- आँख का काजल मिटा मांग का सिंदूर थरथराती देह लुटना रॊज का दस्तूर द...
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रविवार, जनवरी 06, 2019
शराफत की ठंड से
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शराफत की ठंड से सिहर गये हैं लोग दुश्मनी की आंच से बिखर गये हैं लोग-- जिनके चेहरों पर धब्बों की भरमार है आईना देखते ही निखर गये हैं लोग...
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बुधवार, जनवरी 02, 2019
बीती रात का गीत
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अनुबंधों का रूप तुम्हारा रात नहीं सोता होगा प्राणों के हर दरवाजे पर मेरे मन का तोता होगा------- आँखों का परिचय सब आँगन देहरी बांध गया ...
शनिवार, दिसंबर 29, 2018
आसमानी ऊनी शाल
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सम्हाल कर रखा है तुम्हारे वादों का दिया हुआ ब्राउन रंग का मफलर बांध लेता हूँ जब कभी कान में फुसफुसाकर कहती है ठंड कि, आज बहुत ठंड है...
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