शनिवार, फ़रवरी 14, 2026

प्रेम

प्रेम
***
लड़कों की जेब में
तितिर-बितिर रखा 
लड़कियों की चुन्नी में
करीने से बंधा 

दूल्हे की पगड़ी में 
कलगी के साथ खुसा
सुहागन की
काली मोतियों के बीच में फंसा
धडकते दिलों का
बीज मंत्र है 

फूलों का रंग
भवरों की जान
बसंत की मादकता
हरे ठूंठ मधुमास है 

जंगली जड़ी बूटियों का रसायन
झाड़ फूक और सम्मोहन
के ताबीज में बंद
बीमारों की दवा है 

फुटबॉल की तरह उचक कर 
आकाश की तरफ जाता है
और उल्का पिंड बनकर   
दरकी जमीन पर गिरकर
हरियाता है 

कोल्ड ड्रिंग्स की खाली बोतलों सा लुढ़कता 
चाय की चुस्कियों के साथ बिस्किट के साथ गुटक लिया जाता है
और च्यूइंगम की तरह
घंटों चबाया जाता है 

बूढे माँ बाप की
दवाई वाली पर्ची में लिखा
फटी जेबों में रखा रखा
भटकता रहता है 

और अंत में
पचड़े की पुड़िया में लपेटकर 
डस्टबिन में 
फेंक दिया जाता है ---

◆ज्योति खरे

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 15 फरवरी, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  2. वाह्ह.... अति गहन भाव लिए आपकी रचना बहुत दिनों बाद पढ़ने को मिली सर।
    समय और परिस्थितियों के पहिए पर घूमता प्रेम का रंग।
    सादर।
    ------

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  3. प्रेम के अनेक रूपों के दर्शन इस रचना में हो रहे हैं, हर रूप अपने आप में पूर्ण और सत्य की प्रतीति करवाता हुआ

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  4. आपकी यह कविता पढ़कर मुझे बहुत अलग-सा अनुभव हुआ। आपने रोज़मर्रा की चीज़ों के ज़रिए भावनाओं को जिस तरह जोड़ा, वह सच में दिलचस्प लगा। मुझे खास तौर पर लड़कों की जेब, लड़कियों की चुन्नी और दूल्हे की पगड़ी वाले चित्र बहुत जीवंत लगे।

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