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रविवार, मई 01, 2022

मजदूर

मजदूर 
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सपनों की साँसें 
सीने में
बायीं ओर झिल्ली में बंद हैं
जो कहीं गिरवी नहीं रखी
न ही बिकी हैं,
नामुमकिन है इनका बिकना

गर्म,सख्त,श्रम समर्पित हथेलियों में
खुशकिस्मती की रेखाएं नहीं हैं
लेकिन ये जो हथेलियां हैं न !
इसमें उंगलियां हैं
पर पोर नहीं
सीधी-सपाट हैं
नाख़ून पैने
नोचने-फाड़ने का दम रखते हैं 

पैरों की एड़ियां कटी-फटी,तलवे कड़े
घुटने,पंजे,पिडलियां कठोर
पांव जो महानगरीय सड़कों पर 
सुविधा से नहीं चल पाए
राजपथ में
दौड़ने का साहस रखते हैं

छाती में विशाल हृदय 
मजबूत फेफड़ा है
जिसकी झिल्ली में बंद हैं
सपनों की साँसे 

इन्हीं साँसों के बल 
कल जीतने की लड़ाई जारी है
और जीत की संभावनाओं पर
टिके रहने का दमखम है
क्योंकि,
इन्हीं साँसों की ताकत में बसा है 
मजदूर की
खुशहाल ज़िन्दगी का सपना----

◆ज्योति खरे

मजदूर दिवस जिंदाबाद