सोमवार, जुलाई 16, 2012

सुधबुध खो बेठी
बहक गया सावन
बारिश में भींग रहा
अल्हड़पन...............
      "ज्योति"

शनिवार, जुलाई 14, 2012

गाँधी के इस देश में....


 गाँधी के इस देश में--------
सुबह-सुबह पढते ही समाचार
शर्म से झुक जाते हैं सिर
अंधे,गूंगे,बहरे चौराहों पर
भीड़ दहशत में मौन है--------
गाँधी के इस देश में-----------
कब,किसका,कौन है---------?
                            "ज्योति"           

शुक्रवार, जुलाई 13, 2012

सड़क पर भटकते,घूमते....


सड़क पर भटकते,घूमते
अचानक प्यार में गिरफ्तार हो गया 
लोग कहते हैं-------?
वो आबाद हो गया 
थोड़ी सी जमीन ही तो मिली थी उसे 
गरीब मर गया 
जमीदार हो गया................
                             
                              " ज्योति " .......

शुक्रवार, जुलाई 06, 2012

फूल कोमल क्यूँ बना 
सुगंध ही बता पायेगी 
प्यार करने के तरीकों को 
तितली ही बता पायेगी .............
                          "ज्योति"
उम्र जलवो में बसर हो
ये जरुरी तो नहीं
सब पे साकी की
नजर हो तो
ये जरुरी तो नहीं.................

रविवार, जुलाई 01, 2012

खुश रहो कहकर चला...

खुश रहो कहकर चला 
जानता हूँ उसने छला.............
सूरज दोस्त था उसका 
तेज गर्मी से जला............... 
चांदनी रात भर बरसी 
बर्फ की तरह गला................ 
उम्र भर सीखा सलीका 
फटे नोट की तरह चला.......... 
रोटियों के प्रश्न पर
उम्र भर जूता चला............. 
सम्मान का भूखा रहा 
भुखमरी के घर पला............ 
            "ज्योति"

शुक्रवार, जून 29, 2012

हालात

मज़बूरी  और मजदूरी से 
बदतर हुए हालात
दवा दुआ का पता नहीं         
रोग बढ़ रहे दिन रात
जीवन जीने के लिए 
गिरवी रखे जज्वात .........'ज्योति'