रविवार, सितंबर 09, 2012
शनिवार, अगस्त 04, 2012
भूख से बेहाल बच्चे को
बिक गयी बज़ार में हजारों टन मिठाई
एक टुकड़ा भी नहीं हुआ नसीब
भूख से बेहाल बच्चे को
बीनता है पन्नी हमारे घरों के करीब......
"ज्योति खरे "
एक टुकड़ा भी नहीं हुआ नसीब
भूख से बेहाल बच्चे को
बीनता है पन्नी हमारे घरों के करीब......
"ज्योति खरे "
बुधवार, जुलाई 25, 2012
गीत-----सूख रहे आंगन के पौधे----------
गीत-----सूख रहे आंगन के पौधे----------
घर में जबसे अपनों ने
अपनी अपनी राह चुनी
चाहत के हर दरवाजे पर
मकड़ी ने दीवार बुनी............
लौटा वर्षों बाद गाँव में
सहमा सा चौपाल मिला
बाबूजी का टूटा चश्मा
फटा हुआ रुमाल मिला
टूट रही अम्मा की सांसे
कानो ने इस बार सुनी..........
मंदिर की देहरी पर बैठी
दादी दिनभर रोती हैं
तरस रहीं अपनेपन को
रात रात नहीं सोती हैं
बैठ बैठ कर यहाँ वहां
बहुयें करती कहा सुनी..........
दवा दवा चिल्लाते दादा
खांसी रोक नहीं पाते
बडे बड़ों की क्या बतायें
बच्चे भी पास नहीं आते
सूख रहे आँगन के पौधे
दीमक ने हर डाल घुनी..........
"ज्योति खरे"
घर में जबसे अपनों ने
अपनी अपनी राह चुनी
चाहत के हर दरवाजे पर
मकड़ी ने दीवार बुनी............
लौटा वर्षों बाद गाँव में
सहमा सा चौपाल मिला
बाबूजी का टूटा चश्मा
फटा हुआ रुमाल मिला
टूट रही अम्मा की सांसे
कानो ने इस बार सुनी..........
मंदिर की देहरी पर बैठी
दादी दिनभर रोती हैं
तरस रहीं अपनेपन को
रात रात नहीं सोती हैं
बैठ बैठ कर यहाँ वहां
बहुयें करती कहा सुनी..........
दवा दवा चिल्लाते दादा
खांसी रोक नहीं पाते
बडे बड़ों की क्या बतायें
बच्चे भी पास नहीं आते
सूख रहे आँगन के पौधे
दीमक ने हर डाल घुनी..........
"ज्योति खरे"
शुक्रवार, जुलाई 20, 2012
नवगीत********** =सरकती प्यार की चुनरी=
नवगीत**********
=सरकती प्यार की चुनरी=
------------------------------ -------------------
बांध कर पास रखना
तुम्हारा काम है
में पंछी हूँ
उड़ जाऊंगा...........
तुम अकेले ताकते रहना
अपनों से में
जुड़ जाऊंगा..............
साथ रहते अगर
प्यार में उड़ना सिखाता
स्वर्ग के साये में
आसमान का अर्थ बताता
तुम नहीं तो क्या करूँ
में अकेला
फडफडाऊँगा...............
बैठकर आँगन में जब
चांवल चुनोगी
सरकती प्यार की चुनरी
स्म्रतियों के साथ रखोगी
चेह्कोगी चिड़िया बनकर
में भटकता
घर तुम्हारे
मुड़ आऊंगा......................
"ज्योति खरे "
=सरकती प्यार की चुनरी=
------------------------------
बांध कर पास रखना
तुम्हारा काम है
में पंछी हूँ
उड़ जाऊंगा...........
तुम अकेले ताकते रहना
अपनों से में
जुड़ जाऊंगा..............
साथ रहते अगर
प्यार में उड़ना सिखाता
स्वर्ग के साये में
आसमान का अर्थ बताता
तुम नहीं तो क्या करूँ
में अकेला
फडफडाऊँगा...............
बैठकर आँगन में जब
चांवल चुनोगी
सरकती प्यार की चुनरी
स्म्रतियों के साथ रखोगी
चेह्कोगी चिड़िया बनकर
में भटकता
घर तुम्हारे
मुड़ आऊंगा......................
"ज्योति खरे "
गुरुवार, जुलाई 19, 2012
नव गीत ---- साँस रखी दावं ......
नव गीत ----
साँस रखी दावं ......
दहशत की धुंध से
घबडाया गाँव
भगदड़ में भागी
धूप और छावं............
अपहरण गुंडागिरी
खेत की सुपारी
दरकी जमीन पर
मुरझी फुलवारी
मिटटी को पूर रहे
छिले हुए पांव............
कटा फटा जीवन
खूटी पर लटका
रोटी की खातिर
गली गली भटका
जीवन के खेल में
साँस रखी दांव...........
प्यासों का सूखा
इकलौता कुंवा
उड़ लाशों का
मटमैला धुआं
चुल्लू भर झील में
डूब रही नाँव..............
"ज्योति खरे "
साँस रखी दावं ......
दहशत की धुंध से
घबडाया गाँव
भगदड़ में भागी
धूप और छावं............
अपहरण गुंडागिरी
खेत की सुपारी
दरकी जमीन पर
मुरझी फुलवारी
मिटटी को पूर रहे
छिले हुए पांव............
कटा फटा जीवन
खूटी पर लटका
रोटी की खातिर
गली गली भटका
जीवन के खेल में
साँस रखी दांव...........
प्यासों का सूखा
इकलौता कुंवा
उड़ लाशों का
मटमैला धुआं
चुल्लू भर झील में
डूब रही नाँव..............
"ज्योति खरे "
शनिवार, जुलाई 14, 2012
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