उम्मीद तो हरी है .........
दौर पतझड़ का सही, उम्मीद तो हरी है
शनिवार, दिसंबर 22, 2012
बिटिया---------
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स्नेह के आँगन में सूरज की किरण रखती है अपना कदम उस समय तक झड-पुछ जाता है समूचा घर फटकार दिये जाते हैं रात में बिछे चादर बदल दिये जाते ह...
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शनिवार, दिसंबर 15, 2012
सृजन के औजार--------
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आरी काटती है लकड़ी वसूला देता है आकर रन्दा छीलता है चिकना करता है छेनी तराशती है पत्थरों को----- यह सब औजार कारीगरों के हाथों में आकर दुनि...
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सोमवार, दिसंबर 10, 2012
सपनों ने
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सपनों ने गली की पुलिया पर बैठकर यह तय किया अब नहीं दिखेंगे------- सपने कोलाहल में कैसे जीवित रह पायेंगे यह सोचकर सपनों ने छोड़ द...
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रविवार, दिसंबर 02, 2012
यूकेलिप्टस-------------
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यूकेलिप्टस------------- एक दिन तुम और मैं शाम को टहलते उंगलियां फसाये उंगलियों में निकल गये शहर के बाहर----- तुमने पूछा क्या होता है शिला...
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गुरुवार, नवंबर 29, 2012
गुलमोहर-----------
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गुलमोहर------ माना कि तुम्हारे आँगन में जूही,चमेली,रातरानी महकती है पर तुम अपने आँगन में बस एक गुलमोहर लगा लो सौन्दर्य का जादू जमा लो----...
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मंगलवार, नवंबर 27, 2012
रिश्ते जमीन के---------
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बिखरे पड़े हैं क़त्ल से रिश्ते जमीन के----- मुखबिर बता रहे हैं किस्से यकीन के------ चाहतों के मकबरे पर शाम से मजमा लगा है हाथ में तलवार लेक...
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शुक्रवार, नवंबर 23, 2012
गालियां देता मन ......
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गालियां देता मन देह्शत भरा माहौल चुप्पियां दरवाजा बंद करेंगी खिडकियां देंगी खोल----- आदमी की खाल चाहिये भूत पीटें डिडोरा--- मरी हु...
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