मंगलवार, अगस्त 17, 2021

बहन

बहन 
****
एक-
स्मृतियों में बहन
*************
मैं 
टूटकर बिखरते समय
जब भी घबड़ाता हूं
हंसती ,खिलखिलाती
गुलाबी बुंदके वाली
फ्राक पहने
दो चोटी में 
लाल रिबिन बांधें
आ जाती है
मेरे सामने
                 
और जब 
रहता हूँ चुप 
उसके गुनगुनाने की आवाज
कानों में पड़ते ही
टूट जाती है चुप्पी

साथ खेले,साथ बढे
लड़े,झगडे,रूठे,रोये,हंसे
जुडे रहे रिश्तो की
रेशमी डोर से

स्मृतियों के आँगन में
बूढा बचपन
अकेला टहलता है जब
संबंधों की जड़ों में 
लग रही दीमक से
वह ही बचाती है

जीवन बदला 
जीने की परिभाषा बदली
पर नहीं बदली
उसके रिश्तों की भाषा

जानता हूँ 
वह भी 
उलझ गयी है
अपने बनाए 
नये रिश्तों के जंगल में

उससे कहता हूं
जब कभी 
समय निकालकर
ऐसे ही
आ जाया करो
स्मृतियों में
दोनों मिलकर
खीर पूड़ी बनाएंगे---

दो
बहन
*****
बहन 
छोटी या बड़ी
इत्र की शीशी में भरी
परिवार के
संस्कार और परम्पराओं को
सुगंधित करने वाली
गहरी और सुनिश्चित भाग्य रेखा होती है

जीवन की धुरी 
कदमों की पहचान
घटनाओं की आहट 
और जीवन का
तरण द्वार होती है

सैनिको की जान 
ध्वज पकड़े हथेलियाँ 
खिलाड़ियों की सांसें
शिशु की माता 
पिता की धड़कन
मां की सलाहकार
घूमती गोलाकार धरती
कुल्हाडी सी कठोर
फूल सी कोमल
होती है

किसी बदमाश के गाल पर 
झनझनाता 
करारा चांटा भी होती है

बहन
कलाई में लिपटा
एक धागा नहीं 
जीवन का 
सार होती है---

" ज्योति खरे "

14 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (18-08-2021) को चर्चा मंच   "माँ मेरे आस-पास रहती है"   (चर्चा अंक-४१६०)  पर भी होगी!--सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार करचर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'   

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

अदभुद

Manisha Goswami ने कहा…

बहुत ही प्यारी रचना!

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

आपकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति से सम्भवतः कोई भी असहमत नहीं होगा आदरणीय ज्योति जी।

Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर रचना।

अनीता सैनी ने कहा…

हृदयस्पर्शी सृजन।
सादर

Sweta sinha ने कहा…


जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २० अगस्त २०२१ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

वाह
सुन्दर लेखन

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुंदर भब लिए सुंदर कृति ।

Amrita Tanmay ने कहा…

नेह की कोमलता फूल से भी अधिक प्रस्फुटित हो रही है । अति सुन्दर भाव सृजन ।

SANDEEP KUMAR SHARMA ने कहा…

बहन
कलाई में लिपटा
एक धागा नहीं
जीवन का
सार होती है---रिश्तों के मखमली संसार से लाई गई कविता...। बहत खूब।

Sudha Devrani ने कहा…

बहनो के बहुत ही खूबसूरत भावाभिव्यक्ति
वाह!!!

Priya Jaltare ने कहा…

बहन जीवन का सार होती है , अप्रतिम लिखा आप ने सर !👌

Sarita sail ने कहा…

बढ़िया रचना