शनिवार, मार्च 06, 2021

लड़कियां

लड़कियां
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फुटपाथ पर
बेचती है
पालक,मैथी और लाल भाजी
यह वह 
अपनी जमीन के 
छोटे से टुकड़े में बोती है
उसके पास ही 
बेचती है एक लड़की
अदरक,लहसुन और हरी मिर्च
यह वह आढ़त से खरीदती है
दोनों 
अपनी अपनी साइकिलों में
बोरियां बांधकर
पास के गांव से आती हैं

शाम को दुकान समेटने के बाद
खरीदती हैं
घर के लिए 
जरूरत का सामान

दोनों
घर पहुंचने के पहले
एक जगह खड़े होकर
बांटती हैं
अपने अपने दुख

कल मिलने का वादा कर
लौट आती हैं
अपने अपने घर 

सुबह 
फिर मिलती हैं
आती हैं बाजार
संघर्षों के गाल पर
चांटा मारने----

"ज्योति खरे"

30 टिप्‍पणियां:

Virendra Singh ने कहा…

संघर्षों के गाल पर बहुत बढ़िया तमाचा मारती हैं लडकियाँ!सुन्दर सृजन के लिए आपको बधाई।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यथार्थ को समक्ष रख दिया है ।बेहतरीन रचना

Sweta sinha ने कहा…

"इन्हीं संघर्षों के चाँटे की मार से सहमते हैं दुःख और ज़िंदगी मुस्कुराकर कहती है तुम कभी नहीं हार सकती।"
यथार्थ वादी सृजन सर।
प्रणाम
सादर।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

खूबसूरत रचना

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

महिला दिवस क अवसर पर सुन्दर रचना।

Jigyasa Singh ने कहा…

महिला दिवस पर, यथार्थ को बेधती सुंदर रचना..

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार ( 08 -03 -2021 ) को 'आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है' (चर्चा अंक- 3999) पर भी होगी।आप भी सादर आमंत्रित है।

हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

#रवीन्द्र_सिंह_यादव

Onkar ने कहा…

सुन्दर सृजन

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

Kamini Sinha ने कहा…

बेहतरीन सृजन,सादर नमन सर

Alaknanda Singh ने कहा…

ज्योत‍ि जी प्रणाम, विश्व महिला दिवस पर आपने बहुत खूबसूरत कहा...क‍ि
सुबह
फिर मिलती हैं
आती हैं बाजार
संघर्षों के गाल पर
चांटा मारने..वाह

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

अग्रज आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

बहुत आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

MANOJ KAYAL ने कहा…

बहुत सुन्दर सृजन।

ज्योति सिंह ने कहा…

जीवन का आईना दिखाती, संघर्षो से जूझती हुई कहानी को कम शब्दों में बयां कर दिया आपने , सारा सार अंतिम पंक्तियों में उतर आया, बहुत खूब, नमस्कार शुभ प्रभात

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

Jyoti khare ने कहा…

आभार आपका

कुमार गौरव अजीतेन्दु ने कहा…

आशावादी सृजन

Shantanu Sanyal शांतनु सान्याल ने कहा…

प्रभावशाली लेखन - - शुभ कामनाओं सह।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

बेहद उत्कृष्ट सृजन, बधाई.

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत सराहनीय भावनात्मक रचना