प्रेम
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लड़कों की जेब में
तितिर-बितिर रखा
लड़कियों की चुन्नी में
करीने से बंधा
दूल्हे की पगड़ी में
कलगी के साथ खुसा
सुहागन की
काली मोतियों के बीच में फंसा
धडकते दिलों का
बीज मंत्र है
फूलों का रंग
भवरों की जान
बसंत की मादकता
हरे ठूंठ मधुमास है
जंगली जड़ी बूटियों का रसायन
झाड़ फूक और सम्मोहन
के ताबीज में बंद
बीमारों की दवा है
फुटबॉल की तरह उचक कर
आकाश की तरफ जाता है
और उल्का पिंड बनकर
दरकी जमीन पर गिरकर
हरियाता है
कोल्ड ड्रिंग्स की खाली बोतलों सा लुढ़कता
चाय की चुस्कियों के साथ बिस्किट के साथ गुटक लिया जाता है
और च्यूइंगम की तरह
घंटों चबाया जाता है
बूढे माँ बाप की
दवाई वाली पर्ची में लिखा
फटी जेबों में रखा रखा
भटकता रहता है
और अंत में
पचड़े की पुड़िया में लपेटकर
डस्टबिन में
फेंक दिया जाता है ---
◆ज्योति खरे
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