गुरुवार, अगस्त 31, 2023

कैद हुआ मौसम शहरों में

कैद हुआ मौसम शहरों में
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सुविधाओं का मौसम ठहरा
अपना गूंगा उनका बहरा ठहरा..

चर्चित फूलों के खेतों में
नाजुक भाषा की अगवानी
तुलसी ताक रही अपनों को
माली करते है मनमानी

परिचय की परिभाषा सीमित
संबंधों का मौसम ठहरा..
                    
कैद हुआ मौसम शहरों में
शीशों के घर बसा हुआ है
बाग बगीचे सूख गए हैं
गांव में तो धुआं धुआं है

खोल रखी है स्वागत में सांकल
दरवाजे पर मौसम ठहरा...

◆ज्योति खरे

शुक्रवार, अगस्त 25, 2023

छूने के बहाने

छूने के बहाने
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मेरी हरकतों से
खीजने के बावजूद
कई बार
मुझसे बात करने की कोशिश करती हो
और जब मैं उत्तर नहीं देता हूं तो
रात में
तकिए से लिपटकर
मेरी शिकायत करती हुई
अपने आप को
सुलाने की कोशिश करती हो
ताकि सुबह
निपटा सको
घर के अधूरे पड़े काम

मैं भी
तुम्हारी बातें सुनकर
झल्लाने लगता हूँ
और दिनभर का थकाहारा
बिस्तर पर लेटकर
बिना नींद के 
आँखें मूंद लेता हूँ 

हम दोनों जानते हैं
देर तक 
नहीं छोड़ सकते एक दूसरे को अकेला
यह भी जानते हैं कि
झगड़े के बिना
रह भी नहीं सकते हैं

हम दोनों
आंखें मूंद कर भी
पहचान लेते हैं
एक दूसरे की
गुदगुदे अहसास से भरी
रोज़ाना की शिकायतें

पढ़ लेते हैं
देर तक 
बार बार 
करवट बदलने की भाषा
आंखों में तैरती नींद
आखिरकार
उठ कर बैठ जाती है

कुछ देर बाद
हंसने लगते हैं अपन दोनों

जाने लगती हो
मुझे झिड़ककर 
मैं रोक नहीं पाता 
अपने आपको
पकड़कर चूम लेता हूं
तुम्हारा हाथ

छूने के बहाने
फेरता हूं
माथे पर उंगलियां
तुम हो जाती हो तरोताजा

हम दोनों 
किसी न किसी बहाने 
एक दूसरे को 
छूते रहते हैं--

◆ज्योति खरे

सोमवार, अगस्त 21, 2023

बेमतलब

सांप के कान नहीं होते
हम बेमतलब
जिरह की बीन
बजाने पर तुले हैं

सांप दूध नहीं पीते
हम बेमतलब
कटोरी भर
दूध पिलाने पर तुले हैं

सांप के पांव नहीं होते
हम बेमतलब
सांप के पीछे
भागने पर तुले हैं

माना कि
कर्ज की सुपारी में लपेटकर
भेजी जा रही है
जहरीली फुफकार
हम बेमतलब
जहर उतारने पर तुले हैं

किराये के सपेरों को
घूमने दो
गांव की गलियों में
शहर की सड़कों में
हम बेमतलब
अपने घर के सामने 
उनकी पूजा करने पर तुले हैं

गांव हमारे
शहर हमारे
घाटियां हमारी
वादियां हमारी
नदियां हमारी
मौसम हमारे

फिर बेमतलब क्यों डरें
जब हम 
जहरीले सापों को
खदेड़ने पर तुले हैं--

◆ज्योति खरे