गुरुवार, सितंबर 28, 2023

गूंजती है ब्रह्मांड में

गूंजती है ब्रह्मांड में
***************
गौधूलि सांझ में
बादलों के झुंड
डूबते सूरज की पीठ पर बैठकर
खुसुरपुसुर बतियाते हैं

समुद्र की मचलती लहरें
किनारों से मिलने
बेसुध होकर भागती हैं 
और जलतरंग की धुन
सजने संवरने लगती है

इस संधि काल में
सूरज को धकियाते
ऊगने लगता है चांद

लहरें 
किनारों पर आकर 
पूछती हैं हालचाल 
जैसे हादसों के इस दौर में
मुद्दतों के बाद
मिलते हैं प्रेमी
करते दिल की बातें
जो गूंजती हैं ब्रह्मांड में---

◆ज्योति खरे

गुरुवार, सितंबर 21, 2023

ज़मीनदार हो गया

सड़क पर घूमते,भटकते
वह अचानक 
प्यार में गिरफ्तार हो गया 
लोग कहने लगे 
अब वह आबाद हो गया 

उसके हिस्से में
पांव के नीचे की ज़मीन
ही तो मिली थी
इस ज़मीन पर
सदाबहार के पेड़ उगाने लगा
सफेद,बैगनी और हल्के लाल रंगों में
अपने प्यार को महसूसता 
और फुरसत के क्षणों में
कच्ची परछी में बैठकर
प्यार से बतियाते हुए
मुस्कराने लगा

मोहल्ले की नज़र क्या लगी
मुरझाने लगा सदाबहार
दरक गयी
कच्ची परछी पर पसरी
मुस्कुराहट

गरीब
एक दिन
अपने हिस्से की ज़मीन पर 
मरा पाया गया
लोग कह रहे हैं
वह गरीब नहीं था
प्यार को बचा पाने की ज़िद में 
ज़मीनदार हो गया ---

◆ज्योति खरे

गुरुवार, सितंबर 07, 2023

अपने चेहरे में

अपने चेहरे में
***********
वर्षों से सम्हाले 
प्यार के खुरदुरेपन ने
खरोंच डाला है
चेहरे को
लापता हो गयी हैं
दिन,दोपहरें और शामें
काश
पीले पड़ रहे चेहरे को
सुरमा लगाकर
पढ़ पाता इंद्रधनुष
उढ़ा देता
सतरंगी चुनरी

जब कोई
छुड़ाकर हाथों से हाथ
बहुत दूर चला जाता है
तो छूट जाते हैं
जाने-अनजाने
अपनों से अपने
अपने ही सपने
कांच की तरह
टूटकर बिखर जाता है जीवन

फिर नये सिरे से 
कांच के टुकड़ों को समेटकर
जोड़ने की कोशिश करते हैं
देखते हैं 
अपने चेहरे में
अपनों का चेहरा---

◆ज्योति खरे