गुरुवार, मार्च 28, 2013

रंग बह गये------

धुल गया
गाल पर लगा रंग 
उंगलियों के
निशान रह गये----
चलते रहे आँखों में
अतीत के चलचित्र
स्मृतियाँ रह गयी
रंग बह गये------

"ज्योति खरे" 



17 टिप्‍पणियां:

मैं और मेरा परिवेश ने कहा…

सचमुच

mridula pradhan ने कहा…

wah....

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

सिर्फ स्मृतियाँ रह जाती है,,,,,,
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Kalipad "Prasad" ने कहा…

गहरी एहसास !
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Vaanbhatt ने कहा…

स्मृतियाँ ब्लैक और वाइट् में ही आतीं हैं...रंग उड़ चुके होते हैं...

Ramakant Singh ने कहा…

अदभुत निःशब्द करती रचना

Saras ने कहा…

वाह ....कम शब्दों में सब कह गए ...बहुत सुन्दर...:)

अरुन शर्मा 'अनन्त' ने कहा…

वाह क्या बात है आदरणीय गहन अभिव्यक्ति लाजवाब प्रस्तुति बधाई

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…


सुन्दर प्रस्तुति व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

Yashwant Mathur ने कहा…

बहुत बढ़िया सर!


सादर

RAHUL- DIL SE........ ने कहा…

रंग बह गये ....
और रंग एक हो गए ..
-----------------
बहुत सुन्दर

jyoti khare ने कहा…

आप सभी सम्मानित मित्रों का आभार

Manav Mehta 'मन' ने कहा…

बहुत बढ़िया

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति।

Vikesh Badola ने कहा…

बहुत दर्दस्‍पर्शी।

Manika Mohini ने कहा…

बहुत ही संदर अहसास।

Manika Mohini ने कहा…

बहुत ही सुन्दर अहसास।