रविवार, दिसंबर 30, 2012

कुछ और नया होना चाहिये-----





इस धरती पर
कुछ नया
कुछ और नया होना चाहिये-----

चाहिये
अल्हड़पन सी दीवानगी
जीवन का
मनोहारी संगीत
अपनेपन का गीत-----

चाहिये
सुगन्धित हवाओं का बहना
फूलों का गहना
ओस की बूंदों को गूंथना
कोहरे को छू कर देखना 
चिड़ियों सा चहचहाना
कुछ कहना
कुछ बतियाना------

इस धरती पर
कितना कुछ है
गाँव,खेत,खलियान
जंगल की मस्ती
नदी की दौड़
आंसुओं की वजह
प्रेम का परिचय
इन सब में कहीं
कुछ और नया होना चाहिये
होना तो कुछ चाहिये-----

चाहिये
किताबों,शब्दों से जुडे लोग
बूढों में बचपना
सुंदर लड़कियां ही नहीं
चाहिये
पोपले मुंह वाली वृद्धाओं  में
खनकदार हंसी------

नहीं चाहिये
परचित पुराने रंग
पुराना कैनवास
कुछ और नया होना चाहिये
होना तो कुछ चाहिये---------

"ज्योति खरे" 

8 टिप्‍पणियां:

ASHUTOSH CHAUHAN ने कहा…

bahut sundar rachna,,,,,,,,

ASHUTOSH CHAUHAN ने कहा…

bahut shandar aur sarthak rachna ke liye badhai apko,,

ashvaghosh ने कहा…

जी हां अवश्य ही कुछ नया होना चाहिये

Khare A ने कहा…

ek sarthak sandesh deti huyi rachna!
badhayi kabule!

Manika Mohini ने कहा…

"कुछ और नया होना चाहिए' बहुत सुन्दर कविता है। आपकी कवितायेँ बड़े कोमल भावों का सम्प्रेषण करती हैं। कहीं भी रुक्षता नहीं, बोझिलता नहीं। मंद मधुर हवा बह रही हो जैसे। यह कविता भी ऐसी ही है। कुछ नया, कुछ और नया होने, पाने की भावना मनुष्य की अदम्य जिजीविषा की ओर संकेत करती है। भावपूर्ण कविता।

Manika Mohini ने कहा…

"कुछ और नया होना चाहिए' बहुत सुन्दर कविता है। आपकी कवितायेँ बड़े कोमल भावों का सम्प्रेषण करती हैं। कहीं भी रुक्षता नहीं, बोझिलता नहीं। मंद मधुर हवा बह रही हो जैसे। यह कविता भी ऐसी ही है। कुछ नया, कुछ और नया होने, पाने की भावना मनुष्य की अदम्य जिजीविषा की ओर संकेत करती है। भावपूर्ण कविता।

Vandana KL Grover ने कहा…

धरती को ऐसा ही तो होना चाहिए ...शब्द बहुत सरल और सुन्दर

नए बरस में आपकी यह कामना फलीभूत हो ..
दुआएं ..

सादर

अर्चना ठाकुर ने कहा…

उत्तम विचारों की उत्तम रचना..