शुक्रवार, जुलाई 13, 2012

सड़क पर भटकते,घूमते....


सड़क पर भटकते,घूमते
अचानक प्यार में गिरफ्तार हो गया 
लोग कहते हैं-------?
वो आबाद हो गया 
थोड़ी सी जमीन ही तो मिली थी उसे 
गरीब मर गया 
जमीदार हो गया................
                             
                              " ज्योति " .......

शुक्रवार, जुलाई 06, 2012

फूल कोमल क्यूँ बना 
सुगंध ही बता पायेगी 
प्यार करने के तरीकों को 
तितली ही बता पायेगी .............
                          "ज्योति"
उम्र जलवो में बसर हो
ये जरुरी तो नहीं
सब पे साकी की
नजर हो तो
ये जरुरी तो नहीं.................

रविवार, जुलाई 01, 2012

खुश रहो कहकर चला...

खुश रहो कहकर चला 
जानता हूँ उसने छला.............
सूरज दोस्त था उसका 
तेज गर्मी से जला............... 
चांदनी रात भर बरसी 
बर्फ की तरह गला................ 
उम्र भर सीखा सलीका 
फटे नोट की तरह चला.......... 
रोटियों के प्रश्न पर
उम्र भर जूता चला............. 
सम्मान का भूखा रहा 
भुखमरी के घर पला............ 
            "ज्योति"

शुक्रवार, जून 29, 2012

हालात

मज़बूरी  और मजदूरी से 
बदतर हुए हालात
दवा दुआ का पता नहीं         
रोग बढ़ रहे दिन रात
जीवन जीने के लिए 
गिरवी रखे जज्वात .........'ज्योति'

बुधवार, जून 27, 2012

संत

        संत 
यह  बिलकुल सही है कि
संतो कि वाणी सुनकर 
संतो का जीवन देखकर 
संतो का सुख देखकर 
साधारण आदमी भी 
संत बनना चाहता है ...........
    
सरल है संत बनना 
भगवा वस्त्र पहनना 
चन्दन का टीका लगाना 
शब्द जाल में 
भक्तो को उलझाना 

संत बनने के लिए
बिलकुल जरुरी नहीं है जानना 
हिमालय क्यों पिघल  रहा है 
सूख रही है क्यों नदिया 
युद्ध के क्या होंगे परिणाम 
संत तो बस 
हर तरफ से आंखे मूंदकर
जीवन में भक्ति भाव का 
पाठ पढाता है

संत के लिए 
यह जानना  भी जरुरी नहीं है 
क्या होता है
किराये के मकान का दुख 
पत्नी की प्रसव पीड़ा  
बच्चे का स्कूल मे दाखिला 
प्रतियोगिता के इस दौर में 
खुद से खुद का संघर्ष 

सच तो यह है की 
संत 
गृहस्थी  के लफड़े से भागा हुआ  
गैर  दुनियादार आदमी होता है ............
                                        'ज्योति खरे '

सोमवार, मई 28, 2012

जीवन..


 खा लिया है भूखे पेट ने आकाश
जीवन थक कर  हो गया हताश
अब भी तराशना नहीं झोडा उनने
रंगने उबाल रहे हैं पलाश