रविवार, मार्च 08, 2020
चाहती हैं स्त्रियां
बुधवार, मार्च 04, 2020
यार फागुन
गुरुवार, फ़रवरी 27, 2020
सावधान हो जाओ
शुक्रवार, फ़रवरी 14, 2020
अपन दोनों
बुधवार, फ़रवरी 05, 2020
मेरी नागरिकता की पहचान
मेरी नागरिकता की पहचान
उसी दिन घोषित हो गयी थी
जिस दिन
दादी ने
आस-पड़ोस में
चना चिंरोंजी
बांटते हुए कहा था
मेरे घर
एक नया मेहमान आने वाला है
उसी दिन घोषित हो गयी थी
जिस दिन
मेरी नानी ने
छत पर खड़े होकर
पड़ोसियों से कहा था
मैं नानी बनने वाली हूं
किसी सरकारी सफेद पन्ने पर
काली स्याही से नहीं
लिखी गयी है
मां के पेट में उभरी
लकीरों में दर्ज है
जो कभी मिटती नहीं हैं
हमारी नागरिकता की वास्तविक
पहचान है---
सोमवार, फ़रवरी 03, 2020
प्रेम को बचाने के लिए
मेरी जमानत का
इंतजाम करके रखना
जा रहा हूं
व्यवहार की कोरी कापी में
प्रेम लिखने
हो सकता है
लिखते समय
मुझे लाठियों से मारा जाए
सिर फोड़ दिया जाए
या मेरे घर पर
पत्थर बरसायें जाए
कोतवाली में रपट लिखा दी जाए
प्रेम
खेमों और गुटों में विभाजित हो गया है
दोस्तों तैनात हो जाओ
प्रेम को बचाने के लिए---
"ज्योति खरे"
मंगलवार, जनवरी 28, 2020
आम आदमी के हरे भरे सपने
हरे-भरे सपने
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आम आदमी के कान में
फुसफुसाती आवाजें
निकल जाती हैं
यह कहते हुए
कि,
टुकड़े टुकड़े जमीन पर
सपनें मत उगाओ
जानते हो
कबूतरों को
सिखाकर उड़ाया जाता है
लाल पत्थरों के महल से
जाओ
आम आदमी के
सुखद एहसासों को
कुतर डालो
उनकी खपरीली छतों पर बैठकर
टट्टी करो
कुतर डालो सपनों को
सपने तो सपने होते हैं
आपस में लड़ते समय
जमीन पर गिरकर
टुकड़े टुकड़े हो जाते हैं
काले समय के इस दौर में
सपनों को ऊगने
भुरभुरी जमीन चाहिए
तभी तो सपनें
हरे-भरे लहरायेंगे---
"ज्योति खरे"