गुरुवार, जनवरी 24, 2013

खादी के सफ़ेद कुरते में ----------

अब
पडोसी के अमरूद
तोड़कर नहीं खाये जाते
सीधा
पडोसी को ही कर दिया जाता है
खलास---------

लोग अब
छुट्टियों में
अपने गांव नहीं जाते
शहर में ही खोल ली है
दुश्मनी की क्लास--------

हमने पूछा
खादी के सफ़ेद कुरते में
दाग कैसा
वे कहने लगे
कम्मो की देह में कर रहे थे
संभावनाओ की तलाश-------

"ज्योति खरे"

 
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