सोमवार, अप्रैल 22, 2013

धुंध दहशत की हर घर पलेगी------

                                पत्थरों का दर्द भी कोई दर्द है
                                फूंक कर बैठो यहाँ पर गर्द है----

                                मुखबरी होगी यहीं से बैठकर
                                अस्मिता की रात में खिल्ली उड़ेगी
                                अफवाहों की जहरीली हवा से
                                धुंध दहशत की हर घर पलेगी

                                पीसकर खा रहे ताज़ी गुठलियाँ
                                क्या करें थूककर चाटना फर्ज है----

                                पी रहे दांत निपोरे कच्ची दारु
                                जो मिली थी रात को हराम में
                                लाड़ले मुर्गी चबाते नंगे पड़े
                                हथियारों के जंगली गॊदाम में

                                कलफ किये कुर्तो में खून लगा है
                                अखबारों में नाम इनका दर्ज है------

                                                            "ज्योति खरे"


 

22 टिप्‍पणियां:

ashokkhachar56@gmail.com ने कहा…

waaaaaaaah bhot khub waaaaaaaaah

Harihar (विकेश कुमार बडोला) ने कहा…

बहुत गहन।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!
--
शस्य श्यामला धरा बनाओ।
भूमि में पौधे उपजाओ!
अपनी प्यारी धरा बचाओ!
--
पृथ्वी दिवस की बधाई हो...!

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

कलफ किये कुर्तो में खून लगा है
अखबारों में नाम इनका दर्ज है------

yahi to vidambna hai .....

Ranjana verma ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ...

Ranjana verma ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ...

Unknown ने कहा…

कलफ किये कुर्तों पे खून लगा है
अखबारों में इनके नाम दर्ज है
----बहुत गहन

विभा रानी श्रीवास्तव 'दंतमुक्ता' ने कहा…

पीसकर खा रहे ताज़ी गुठलियाँ
क्या करें थूककर चाटना फर्ज है-
सच्ची बात ...
उम्दा अभिव्यक्ति ....

सदा ने कहा…

पत्थरों का दर्द भी कोई दर्द है
फूंककर बैठो यहाँ पर गर्द है
बेहद गहन भाव लिये हुये उपरोक्‍त पंक्तियां
आभार

राहुल ने कहा…

सुंदर रचना..बहुत गहन..

कालीपद "प्रसाद" ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!
डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को, अनुभव करे मेरी अनुभूति को
latest post बे-शरम दरिंदें !
latest post सजा कैसा हो ?

amrendra "amar" ने कहा…

behtreen rachna

दिगंबर नासवा ने कहा…

कलफ किये कुर्तो में खून लगा है
अखबारों में नाम इनका दर्ज है---

फिर भी मेरा देश महान है ... कितनी विडम्बना है देश की ... लाजवाब लिखा है ...

Unknown ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ...

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

आज की ब्लॉग बुलेटिन बिस्मिल का शेर - आजाद हिंद फौज - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Anupama Tripathi ने कहा…

gahan abhivyakti ..
shubhkamnayen .

shashi purwar ने कहा…

आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...सादर।

Sadhana Vaid ने कहा…

ओह ! हर शब्द से जैसे आग सी निकल रही है ! बहुत ही सशक्त एवँ अनुपम रचना ! शुभकामनायें स्वीकार करें !

Kailash Sharma ने कहा…

कलफ किये कुर्तो में खून लगा है
अखबारों में नाम इनका दर्ज है------

...बहुत गहन और सशक्त अभिव्यक्ति...

अरुणा ने कहा…


सही जगह प्रहार है ज्योति जी .......

........गरीब की साँसे चुरा कर जी रहे
........सत्ता का नशा चढा तो खून उसका पी रहे

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बहुत अच्छा लगा आपके ब्लाग पर आकर. अच्छी रचना है.

पूरण खण्डेलवाल ने कहा…

लाजवाब लेखन !!
आभार !!