बुधवार, सितंबर 23, 2015

इरादों की खेती करेंगे ----


अपने इरादों को
तुमने ही दो भागों में बांटा था
तुम अपने हिस्से का
दुपट्टे में बांधकर
ले गयी थी
यह कहकर
मैं अपने इरादे पर कायम रहूंगी
पूरा करुँगी ---


मैं अपने इरादों को
मंजिल तक पहुंचाने
परिस्थितियों से जूझता रहा
अपने इरादों पर
आज भी कायम हूँ
शायद तुम ही
अपने इरादों से बधें दुपट्टे को
पुराने जंग लगे संदूक में रख कर भूल गयी ---

अपने इरादों का दुपट्टा ओढ़कर
बाहर निकलो --
मैं साइकिल लिए खड़ा हूँ
सड़क पर
तुम्हारे पीछे बैठते ही
मेरे पाँव
इरादों के पैडिल को घुमाने लगेंगे---

दूर बहुत दूर
किसी बंजर जमीन पर ठहर कर
अपन दोनों
इरादों की
खेती करेंगे ----

                      "ज्योति खरे"

चित्र-- गूगल से साभार 
एक टिप्पणी भेजें