शनिवार, नवंबर 02, 2013

उजाले की उजली शुभकामनाऐं-------


                                प्रारंभ में 
                           एक दीपक जला
                      उजाला दूर दूर तक फैला
                और भटकते अंधेरों से लड़ने लगा

                    संवेदनाओं के चंगुल में फंसा
                         जनमत के बाजार में
                               नीलाम हुआ
                         जूझता रहा आंधियों से
                             नहीं ख़त्म होने दी
                            अपनी,टिमटिमाहट
                     बारूद के फूलों की पंखुड़ियों पर
                                  लिख रहा है
                             अपने होने का सच

                                      दीपक
                             आज भी उजाले को 
                           मुट्ठियों में भर भर कर 
                            घर घर पहुंचा रहा है---
           
                                                        " ज्योति खरे "
       
 



  

19 टिप्‍पणियां:

kavita verma ने कहा…

दीपक
आज भी उजाले को
मुट्ठियों में भर भर कर
घर घर पहुंचा रहा है---
bahut sundar bhav ..deepavali ki shubhkamnaye ..

Ranjana Verma ने कहा…

बहुत सुंदर !!
दीपावली कि हार्दिक शुभकामना !!

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (03-11-2013) "बरस रहा है नूर" : चर्चामंच : चर्चा अंक : 1418 पर भी है!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
प्रकाशोत्सव दीपावली की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

निहार रंजन ने कहा…

बहुत सुन्दर. दीवाली की शुभकामनायें.

रविकर ने कहा…

पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |
वली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक |
सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का |
कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का |
जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी |
रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||


वली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी
पावली=चवन्नी
गावदी = मूर्ख / अबोध

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर !
दीपावली की शुभकामनाएं !
नई पोस्ट आओ हम दीवाली मनाएं!

pratibha sowaty ने कहा…

sundr rachna sr

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दीपक की दीपशिखा यूं ही जलती रहे ...
दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाए...!
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RECENT POST -: दीप जलायें .

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर. दीपोत्सव की मंगलकामनाएँ !!
नई पोस्ट : कुछ भी पास नहीं है
नई पोस्ट : दीप एक : रंग अनेक

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आप सभी को सपरिवार दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और मंगलकामनायें !!
ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन आई थोड़ी मीठी - थोड़ी खट्टी दिवाली - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

दीपक की तरह आप भी उजाला फैलाएँ :)
दीपोत्सव की शुभकामनायें !!

Vikesh Badola ने कहा…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

Kartikey Raj ने कहा…

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाए...!

सदा ने कहा…

उजले शब्‍दों का अनुपम प्रकाश लिये ...
अनुपम अभिव्‍यक्ति
दीपोत्‍सव की अनंत शुभकामनाएं

आशा जोगळेकर ने कहा…

AApka Deepak ujala muththi me bharkar youn hee lutata rahe.
Shubh deepawali par sarthak rachana.
Asha hai depwali such se beet rahee hai.

Asha joglekar ने कहा…

Aapka Deepak youn hee ujala lutata rahe muththiyan bhar bhar.
Shubh Deepawali. sunder kawita ke liye sashuwad sweekaren

Vikas Gupta ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता । चाहे जितना भी घना अन्धकार हो उसे दूर करने के लिए एक छोटा दीपक ही काफी है ।

Saras ने कहा…

अनुपम अभिव्यक्ति !!!