मंगलवार, मई 07, 2013

मन का दुखड़ा सुनाता है--------


बीनकर लाता है
दिनभर में
काला दुःख
लाल कपट
सफ़ेद छल
टुकड़े टुकड़े हंसने की चाह
कुनकुनी रात की रंगीनियां
अवैध संबंधों की जांघ में
गपे छुरे का गुमनाम सच------

सरकारी अस्पताल में
मरने के लिये
मछली सी फड़फड़ाती
पुसुआ की छोकरी
और डाक बंगले में फिटती रही
रातभर रमीं
लुढ़कती रहीं
खाली बोतलें --------

डालकर गले में हांथ
खुरदुरे शहर का हाल बताता है
मन का दुखड़ा सुनाता है
तो
किसी का क्या जाता है--------

"ज्योति खरे"
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